पटना, 04 सितंबर। भारतीय युवाओं में देशप्रेम की अद्भुत भावना होती है। देश के युवाओं ने संकट के समय अग्रणी भूमिका निभाई है। भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी शक्ति और संभावना है। आवश्यकता है कि युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा, ज्ञान और सामर्थ्य को सही दिशा में लगाया जाए। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर-पूर्व क्षेत्र (बिहार-झारखण्ड) के क्षेत्र कार्यवाह डॉ मोहन सिंह ने पटना में आयोजित तीन दिवसीय युवा शिविर के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए कही।
पटना के मर्चा-मर्ची रोड के केशवपुरम स्थित केशव सरस्वती विद्या मंदिर सैनिक स्कूल में आयोजित शिविर में उन्होंने कहा कि समाज में मिल-जुलकर रहने, एक साथ आगे बढ़ने और आपसी एकता का संदेश देने की आवश्यकता है। राष्ट्र निर्माण केवल भौतिक संसाधनों, व्यवस्थाओं और संस्थाओं से नहीं होता, बल्कि नागरिकों के चरित्र, संस्कार, कर्त्तव्य बोध और सामाजिक उत्तरदायित्व से होता है।
बिहार के 6 जिला से आए युवाओं से बातचीत करते हुए डॉ सिंह ने कहा कि मो. बिन कासिम से लेकर अब तक प्रत्यक्ष या परोक्ष आक्रमणों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक एकता को छिन्न भिन्न करने के प्रयास लगातार जारी हैं। लेकिन भारतीय युवा बल ने अपने कौशल और समझ बूझ से आक्रांताओं के हरेक प्रयास को असफल किया है। आज देश में जाति भेद के माध्यम से सामाजिक वैमनस्य फैलाने की खतरनाक कोशिश हो रही है। पर्यावरण के समक्ष कई चुनौतियां हैं। भारतीय संस्कृति के आधार परिवार व्यवस्था को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है।

संघ ने इन सभी समस्याओं को समझकर शताब्दी वर्ष का मूल भाव पञ्च परिवर्तन रखा है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने इतिहास और परंपराओं को ध्यान में रखते हुए सुसंस्कृत जीवन-पद्धति के द्वारा राष्ट्र को परम वैभव की शिखर पर ले जाने का संकल्प लें। सत्र में उनके साथ मंच पर दक्षिण बिहार के सह प्रांत कार्यवाह डॉ विनायक पद्माकर जी भी उपस्थित थे।

