बालिका शिक्षा के माध्यम से सशक्त, स्वावलंबी, संस्कारित एवं विकसित राष्ट्र के निर्माण के संकल्प के साथ सर्व शिक्षा सेवा न्यास द्वारा द्वारा आयोजित बालिका शिक्षा कार्यशाला का शुभारंभ उत्साहपूर्ण वातावरण में 31 अक्टूबर को हुआ। कार्यशाला का आयोजन विद्या भारती, बिहार के तत्वावधान में किया गया था।
उद्घाटन सत्र में अखिल भारतीय बालिका शिक्षा प्रमुख रेखा चूड़ासामा जी, बालिका शिक्षा के मार्गदर्शक अवनीश भटनागर जी तथा विद्या भारती के क्षेत्रीय संगठन मंत्री ख्याली राम जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। अध्यक्षता डॉ रूबी ने की।

कार्यशाला का उद्देश्य बालिका शिक्षा के व्यापक स्वरूप पर विमर्श करना, बालिकाओं के सर्वांगीण विकास की दिशा में प्रभावी कार्ययोजना तैयार करना तथा शिक्षा के माध्यम से उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, स्वावलंबन एवं राष्ट्रबोध का विकास करना है।
अवनीश भटनागर जी ने इस बात पर बल दिया कि बालिका शिक्षा का अर्थ केवल औपचारिक साक्षरता अथवा शैक्षणिक उपलब्धि तक सीमित नहीं है। बालिका के व्यक्तित्व का समग्र विकास, उसकी अंतर्निहित प्रतिभा का प्रकटीकरण, जीवन-मूल्यों का संवर्धन तथा उसे अपने दायित्वों के लिए तैयार करना भी शिक्षा के महत्त्वपूर्ण आयाम हैं।
सुश्री रेखा चूड़ासामा ने बताया कि एक शिक्षित, समर्थ और संस्कारित बालिका न केवल अपने परिवार को दिशा देती है, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की संवाहक बनती है। इसलिए बालिका शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की दीर्घकालिक प्रक्रिया के रूप में देखना आवश्यक है।
डॉ रूबी ने बालिकाओं की वर्तमान शैक्षिक एवं सामाजिक आवश्यकताओं, भारतीय दृष्टिकोण पर आधारित शिक्षा, व्यक्तित्व विकास, जीवन-कौशल, आत्मरक्षा, नेतृत्व क्षमता तथा सामाजिक सहभागिता जैसे विषयों पर भी सार्थक प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया।
इस कार्यशाला में बिहार और झारखंड प्रांतों में संचालित सरस्वती विद्या मंदिरों के 50 से अधिक महिला आचार्यों की सहभागिता हुई।
