भारत की नारी शक्ति आज हर क्षेत्र में अग्रणी हो रही है, चाहे वह विज्ञान का क्षेत्र हो या खेल का। परंतु बहनों को हमेशा स्मरण रहना चाहिए कि उनके गर्भ में भारत का भविष्य पलता है। इसलिए अपनी बहनों को मातृत्व भाव को कायम रखते हुए जीवन के हर क्षेत्र में आगे जाना है। उक्त विचार राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका माननीया शांता कुमारी ने 14 जून को पटना में व्यक्त किए।

ज्ञात हो कि पटना सिटी के मरचा मरची रोड स्थित केशव सरस्वती विद्या मंदिर सैनिक स्कूल में राष्ट्र सेविका समिति द्वारा 15 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग (प्रवेश) एवं घोष वर्ग आयोजित किया गया था। उत्तर पूर्व क्षेत्र (बिहार-झारखण्ड) के इस वर्ग में कुल 120 की संख्या थी। संघ शिक्षा वर्ग (प्रवेश) की संख्या 90 थी, जबकि घोष वर्ग की संख्या 30 थी। वर्ग के समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मा. शांता कुमारी ने कहा कि नारी में दिव्य शक्ति विद्यमान रहती है। उनमें विशेषकर दो शक्तियों का ज्यादा प्रभाव रहता है। ये दो शक्तियां हैं – अनुग्रह शक्ति और निग्रह शक्ति। इन शक्तियों का अनुसरण करके परिवार, समाज और देश के कल्याण का समग्र कार्य मातृत्व भाव से किया जा सकता है। उन्होंने समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन निःस्वार्थ भाव से करने का आग्रह भी किया।
अनुग्रह और निग्रह शक्तियों के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अनुग्रह शक्ति का अर्थ है ‘कृपा’, ‘दया’ या आशीर्वाद। यह ईश्वर का वह सहज प्रवाह है जो साधक को आध्यात्मिक ज्ञान, शांति और मुक्ति की ओर ले जाता है। इसके प्रभाव से कठिन परिस्थितियां आसान हो जाती हैं और हृदय में विनम्रता और श्रद्धा का भाव उत्पन्न होता है। स्वामी विवेकानंद की पूज्य माता भुवनेश्वरी देवी ने एक माह का निर्जला उपवास किया था ताकि उनके गर्भ से ऐसा व्यक्ति उत्पन्न हो जो विश्व का मार्गदर्शन कर सके। उनके अनुग्रह पर देव कृपा हुई और स्वामी जी उत्पन्न हुए। हमारे यहां ऐसे कई दृष्टांत हैं।
अनुग्रह के साथ-साथ निग्रह शक्ति भी आवश्यक है। निग्रह शक्ति का अर्थ है ‘नियमन’ या ‘बन्धन’। यह कर्मफल, मर्यादा और अनुशासन का क्षेत्र है। इसके प्रभाव से व्यक्ति सांसारिक सीमाओं में रहते हुए परिवर्तन लाता है। निग्रह शक्ति हमें कर्म और सीमाओं के चक्र में रखती है। कोरोना के समय का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कच्छ के भुज में दाह संस्कार के लिए मारा-मारी हो रही थी। कर्मचारी पैसे लेकर दाह संस्कार कर रहे थे। जो पैसे नहीं दे रहे थे, उनके लाशों को जैसे तैसे जलाया जा रहा था। इस परिस्थिति में सेविका समिति की बहनों ने मोर्चा संभाला। बिना किसी हंगामे के बहनों ने लाशों के उचित ढंग से जलाने का प्रबंध किया। इतना ही नहीं बल्कि अस्थि की बढ़िया तरीके के पैक कर मृत व्यक्ति के नाम के साथ उनके परिजनों को सौंप रही थी।
समापन समारोह की मुख्य अतिथि प्रख्यात चर्म रोग विशेषज्ञ और पीएमसीएच की विभागाध्यक्ष डॉ अनुपमा सिंह थी। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का स्वागत दक्षिण बिहार प्रान्त की प्रान्त कार्यवाहिका कमला सिंह ने किया। समापन समारोह में अखिल भारतीय सरकार्यवाहिका सुनीता हल्देकर, वर्ग की सर्वाधिकारी इंदिरा तिवारी, सह प्रांत कार्यवाहिका निवेदिता सिंह, रेणु दीदी अदिति, पुष्पांजलि, शीला दीदी समेत सैकड़ों बहनें उपस्थित थी। कार्यक्रम देखने पटना से बड़ी संख्या में लोग आए थे।
