बातचीत – यूसुफ ( निदेशक, बिहार संग्रहालय)
मुद्दा- बिहार संग्रहालय

1.बिहार संग्रहालय का निर्माण किन उद्देश्यों को ध्यान में रख कर किया गया था?


उत्तर:- विश्व स्तरीय का एक भी संग्रहालय हमारे पूरे देश में नहीं है। इसी  को ध्यान में रख कर इस संग्रहालय का निर्माण किया गया। दूसरे संग्रहालयों में वस्तुओं को छूने की इजाजत नहीं है। यहाँ इस बात की इजाजत है। जब तक आप किसी वस्तु को छू नहीं सकते, उसे महसूस नहीं कर सकते हैं। बिहार संग्रहालय समाज के सभी तबके के लोगों को जोड़ने का काम करती है। यहाँ बच्चों के लिए ‘जंगल सफारी’ की एक पूरा गैलेरी है। समय – समय पर हम अलग – अलग क्षेत्रों के बारे में जानकरी देने के लिए प्रदर्शनी का आयोजन करवाते हैं। संगीत, संवाद श्रृंखला, लेक्चर सीरीज, फ़िल्म फेस्टिवल इत्यादि, इन तमाम चीज़ों से जनता का जुड़ाव होता है। नए तकनीक का इस्तेमाल कर के इसे जनता के लिए और सुगम बनाते हैं। स्कूलों से आने वाले ट्रिप के लिए गाइड की व्यवस्था करवाते है। उन बच्चों को टिकट पर छूट भी मिलती है। कार्य दिवस  में 1000-1500 तक लोग यहाँ आते हैं। अवकाश दिवस में 5000 तक लोग आते हैं।
16 सिंतबर को एम.एफ़.हुसैन के प्रिंटिंग प्रदर्शनी का आयोजन होने जा रहा है। जिसे बताने के लिए विशेषज्ञ मौजूद रहेंगे।

2.शहर में पटना संग्रहालय के रहते हुए बिहार संग्रहालय की जरूरत क्यों पड़ी?


उत्तर:- दोनों में बहुत फर्क है। पटना संग्रहालय में केवल पुरातात्विक महत्व को ध्यान में रख कर बनाया है। बिहार संग्रहालय में समकालीन के साथ- साथ पुरातात्विक को भी स्थान दिया गया है। पटना संग्रहालय आज मृतप्रायः स्थिति में पहुँच चुका है। बिहार संग्रहालय जीवंत है। यहाँ आप सेल्फी ले सकते हैं, हर घण्टे डॉक्यूमेंट्री का मजा ले सकते हैं। संग्रहालय के अंदर एक कैफ़ेटरिया है। हाल ही में बिहार संग्रहालय में ‘कौड़ी से क्रेडिट कार्ड तक के सफर’ की प्रदर्शनी दिखायी गयी थी। इन सब चीजों से दर्शकों को बहुत जानकारी मिलती है।

3.बिहार में मूर्ति तस्करों का एक बड़ा केंद्र है। बिहार संग्रहालय के द्वारा क्या आम जन को जागरूक करने के लिए कोई पहल की जा रही है?


उत्तर:- बिहार संग्रहालय की सिक्योरिटी बहुत मजबूत है। तीन स्तर पर सिक्युरिटी की व्यवस्था है। आम जन को जागरूक करने के लिए समय – समय पर मूर्तियों से जुड़ी डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित करते हैं, ताकि लोगों को मूर्तियों के बारे में अधिक से अधिक जानकरी प्राप्त हो सके। वैसे, आपके जानकरी के लिए बता दूं, मूर्ति तस्करों का एक अलग गुट है। आम आदमी तो देख कर बता भी नहीं सकता है कि कौन असली है कौन नकली।

4.बिहार संग्रहालय में टिकट का मूल्य सौ रुपया है। आपको नहीं लगता है बिहार के नज़र से यह राशि कुछ अधिक है?


उत्तर:- अगर राशि अधिक होती तो पिछले महीने 28 हज़ार लोग इस संग्रहालय को देखने नहीं आते। विश्व स्तर के संग्रहालय के रख-रखाव में बहुत अधिक खर्च होता है। आप बिहार संग्रहालय के टिकट पर उसी दिन पटना संग्रहालय भी देख सकते हैं। एक महीने में 20 से 22 लाख सिर्फ बिजली बिल आता है। बिहार संग्रहालय में कभी भी गंदगी दिखाई नही देती है। बाहर के रेस्टुरेंट से अधिक कमाई संग्रहालय के अंदर के कैफ़ेटरिया को होती है। श्रेष्ठता को बरकरार रखने के लिए टिकट का दाम इतना है। दर्शकों के लिए ही यह पैसे लिए जाते हैं, ताकि उन्हें भरपूर ज्ञान और मनोरंजन की प्राप्ति हो। टिकट का दाम सरकार तय करती है। आम जन की सहभागिता को देखते हुए कहा जा सकता है लोगों को इस राशि से कोई आपत्ति नहीं है।

5.बिहार संग्रहालय के तरफ से भविष्य में किन – किन योजनाओं पर काम हो रहा है?


उत्तर:- जो गैलरी अधूरी है उसे पूर्ण करना हमारा पहला लक्ष्य है। विश्व के सभी संग्रहालयों के जो मुख्य चीज़े है उसका डॉक्यूमेंट्री तैयार कर के उसको अपने यहाँ प्रदर्शित करने का इरादा है। ‘एक्सचेंज प्रोग्राम’ को बढ़ावा देना हमारी प्राथमिकता है, इससे दूसरे जगहों पर जा कर हम अपनी संस्कृति और इतिहास के बारे में बता सकते हैं। समय के साथ और आधुनिक बनाने का इरादा है।
वार्ताकार – अभिलाष दत्ता

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