पटना, 21 अप्रैल। पत्रकारिता की मर्यादा को ध्यान में रखकर यदि पत्रकारिता की जाए तो खतरे काफी हद तक कम हो जाते हैं। एक पत्रकार से अपेक्षा की जाती है कि वह किसी व्यक्ति, संस्था या व्यवस्था का विरोधी न बनते हुए त्रुटियों को उजागर करे। ऐसे में एक पत्रकार के विरोध में खड़े कुछ निहितस्वार्थी तत्व का समाज विरोधी बन जाता है। यही लोकमत जागरण है। अपने पेशागत गरिमा को ध्यान में रखकर ईमानदारी से कर्तव्य निर्वहन करने की आवश्यकता है। मार्यादा से युक्त पत्रकारिता ताकत वाली होती है। उक्त विचार बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूत्र्ति मंधाता सिंह ने ‘मीडिया की मर्यादा और पत्रकार सुरक्षा कानून’ विषयक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए व्यक्त किया।
पटना के विश्व संवाद केंद्र सभागार में आयोजित संगोष्ठी के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि बिहार में पत्रकारों की हत्या हो रही है है लेकिन विचार गोष्ठी में यह बात उभरकर सामने आई कि कई पत्रकारों की हत्या सिर्फ समाचार संकलन या पत्रकारिता पेशे के कारण नहीं बल्कि उसकी जड़ें कहीं और भी थी।


संगोष्ठी का विषय प्रवेश कराते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं स्वत्व के संपादक तथा एनयूजे (आई), बिहार के उपाध्यक्ष कृष्णकांत ओझा ने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य समाज में समाचार और विचार का प्रसार कर लोकतंत्र को स्वस्थ बनाने के अनुकूल वातावरण बनाना है लेकिन पत्रकारिता अपने मूल उद्देश्य और कर्म से भटक कर जब एजेंडा तय करने लगे तो यह समाज व देश दोनों के लिए घातक होता है। पत्रकारिता का किसी संगठन, किसी संस्था या व्यक्ति के हथियार के तौर पर उपयोग की प्रवृत्ति बढ़ी है। यही कारण है कि पत्रकार निरपेक्ष ना रह कर कहीं ना कहीं किसी खेमे में खड़े दिखते हैं और आक्रोश के शिकार होते हैं। इसके लिए जिस प्रकार का वातावरण मीडिया हाउस के द्वारा बनाए गए हैं उसमें भी सुधार की आवश्यकता है। इसके साथ पत्रकार सुरक्षा कानून भी आवश्यक है।
वरिष्ठ पत्रकार एवं बिहार प्रेस मेंस यूनियन के अध्यक्ष एस. एन. श्याम ने कहा कि पत्रकारों को अपनी मर्यादा का ख्याल अवश्य करना चाहिए। पत्रकार अपराधी तत्वांे के लिए सबसे आसान लक्ष्य है। पत्रकारों की सुरक्षा के लिए 2005 से पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग की जा रही है। 2017 में महाराष्ट्र सरकार ने पत्रकार सुरक्षा कानून राज्य में लागू किया। इसमें सिर्फ पत्रकारों की सुरक्षा की बात नहीं की गई है बल्कि पत्रकारों के द्वारा पीड़ित परिवार की सुरक्षा की व्यवस्था भी की गई है। बिहार में भी इस प्रकार के सुरक्षा कानून की आवश्यकता है।


वरिष्ठ पत्रकार एवं बिहार राज्य श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के महासचिव प्रेम कुमार ने पत्रकार सुरक्षा कानून के औचित्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पत्रकारों की आए-दिन हत्याएं हो रही है। पत्रकार न तो अपनी संस्था में और न ही समाज में सुरक्षित है। अतः पत्रकार सुरक्षा कानून अत्यंत आवश्यक है। वरिष्ठ पत्रकार चंदन झा ने मीडिया घराने के अंदर दी जाने वाली धमकियों के अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि मीडिया हाऊस के अंदर भी दबंग तत्व के लोग खबरों को बेवजह रोकने के लिए धमकी देते हैं। आॅल इंडिया रिपोर्टस एसोसिएशन के बिहार प्रदेश सचिव नीरव समदर्शी ने पत्रकारों की मार्यादित व्यवहार और पत्रकार सुरक्षा कानून पर अपने विचार व्यक्त किये। देश के पहरेदार के संपादक सुमन कुमार, मीडियाकर्मी सुनैना, वरिष्ठ छायाकार देवव्रत समेत कई पत्रकारों ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किये।
कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन विश्व संवाद केंद्र के न्यासी हरिशंकर शर्मा ने किया। मंच संचालन वरिष्ठ पत्रकार विजय कृष्ण अग्रवाल ने किया। कार्यक्रम में हमारा दिनमान के प्रधान संपादक महेश कुमार सिंह, पत्रकार आदित्य वैभव, छायाकार महेश सोनी, सिनेमेटोग्राफर नरेन्द्र सिंह, फिल्म विश्लेषक प्रशांत रंजन समेत मो. शकील, पत्रकार अमलेन्दु मिश्र समेत कई लोग उपस्थित थे।

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