पटना, 31 मार्च। आज प्रकृति व विकाश के बीच टकराव की स्थिति सामने आ रही है। औद्योगिक विकास की कीमत पर्यावरण अवमूल्यन के रूप में सामने आ रही है। पर्यावरण के जरूरी विषयों को रेखांकित करने का प्रयास ‘रत्नगर्भा’ स्मारिका है। यह बिहार ही नहीं बल्कि पर्यावरण क्षरण से जूझ रहे संपूर्ण विश्व के लिए उपयोगी है। आज यह हमें प्रण लेना चाहिए कि हम अपनी अगली पीढ़ी को एक बेहतर धरती छोड़ कर जायें। उक्त बातें बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने विश्व संवाद केंद्र द्वारा प्रकाशित स्मारिका ‘रत्नगर्भा’ का विमोचन करते हुए कहीं।
उन्होंने पिछले वर्ष बिहार में आये बाढ़ की चर्चा करते हुए कहा कि किशनगंज व अररिया ऐसे जिले हैं जहां पहले बाढ़ नहीं आता था। यह जलवायु परिवर्तन और पारिस्थितिकी विस्थापन का परिणाम ही है कि नये इलाके भी बाढ़ग्रस्त हो रहे हैं। आज से 20-25 साल पहले भी पर्यावरण संरक्षण की बातें होती थी। आज भी बातें हो रही हैं लेकिन पर्यावरण को संरक्षित करने के जमीनी स्तर पर जो प्रयास होने चाहिए थे वे नहीं हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सौभाग्य की बात है कि पटना में 24 घंटे पानी उपलब्ध है। चेन्नई, हैदराबाद, रायपुर, जमशेदपुर जैसे औद्योगिक रूप से विकसित शहरों की चर्चा करते हुए मोदी ने कहा कि इन शहरों में आधारभूत संरचनात्मक विकाश तो हुए लेकिन इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी। आज स्थिति यह है कि कई शहरों में पानी की रासनिंग हो रही है। एक से दो घंटे तक घरों में जलापूर्ति की जाती है। उसी सीमित जल में लोगों को अपना काम चलाना पड़ रहा है। पानी की एक-एक बूंद के लिए लोग संघर्षरत हैं। ऐसी स्थिति हमलोगों ने स्वयं विकसित की है। सरकार अपने स्तर से प्रयास कर रही है लेकिन इससे भी बड़ी बात है कि हरेक व्यक्ति अपने स्तर से पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध हो। प्रत्येक व्यक्ति अपने घर में पृथ्वी दिवस पर बिजली के आवश्यकतानुसार उपयोग के बारे में बच्चों को सिखाये। उन्होंने गंगा नदी के प्रवाह में आये बदलाव की चर्चा करते हुए बताया कि गंगा नदी में दूषित पानी का प्रवाह रूके इसके लिए गंगा के आस-पास के गांवों को ओडीएफ फ्री किया गया है एवं नदी के किनारे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाये गये हैं। इसका उद्देश्य गंगा को दूषित होने से बचाने के साथ-साथ गंगा की अविरल धारा को बनाये रखना भी है।


इस अवसर पर पर्यावरणविद् डाॅ. मेहता नगेन्द्र सिंह ने कहा कि रत्नगर्भा स्मारिका हमें सचेत करने के लिए है कि अगर प्रकृति से छेड़छाड़ करना हमने बंद नहीं किया तो प्रकृति पंचमुखी रूप में अपने विनाश का बदला हमसे लेगी। उन्होंने कहा कि पर्वत, जंगल, नदी व कृषि योग्य भूमि के साथ हमने जो संवेदनहीन व्यवहार किया, उसी का नतीजा है कि आज हमें आधुनिक सुख-सुविधाओं के दौर में अतिवृष्टि, सुखाड़, भूकंप, चक्रवात और ज्वालामुखी जैसे प्राकृतिक आपदाओं का कोपभाजन बनना पड़ रहा है। उम्मीद है ‘रत्नगर्भा’ जैसी पाठ्य सामग्री को पढ़ने के बाद लोगों के मन में पर्यावरणसंरक्षण को लेकर जागरूकता आयेगी।
विश्व संवाद केंद्र के सचिव डाॅ. संजीव चौरसिया ने संस्था के कार्य योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि विश्व संवाद केंद्र मानव के लिए जरूरी विषयों को अपने आरंभिक काल से ही सामने लाता रहा है। इस दिशा में पर्यटन, संस्कृति, सिनेमा और अब पर्यावरण जैसे विषय पर स्मारिका का प्रकाशन सराहनीय है। उन्होंने बताया कि स्मारिका प्रकाशन के अतिरिक्त यह संस्था संगोष्ठी, कार्यशाला के माध्यम से पर्यावरणव संस्कृति के क्षेत्र में जागरूकता लाने का प्रयास कर रही है।
विश्व संवाद केंद्र के सम्पादक संजीव कुमार ने इस अवसर पर बताया कि भारत के अन्य राज्यों के मुकाबले बिहार को शैडो एरिया में रखा जाता है। देश के अन्य लोगों के मन में बिहार को लेकर जो नकारात्मक छवि पिछले 20-25 सालों में बन गई थी उसमें सुधार के लिए यह संस्था कार्य कर रही है। उदाहरण के लिए बिहार के सांस्कृतिक एवं सामाजिक मूल्यों को केंद्र में रखकर गौरवपूर्ण बिहार नाम से स्मारिका का प्रकाशन वर्षों पहले किया गया था। इसकी सराहना देशभर में हुई थी। उसके बाद बिहार के ऐसे पर्यटन स्थल जो विश्व भर में प्रसिद्ध हैं, को बौद्धिक जगत के बीच स्मारिका के माध्यम से लाया गया। सिखों के दशवें गुरु श्री गुरुगोविंद सिंह जी महाराज के 350वें प्रकाशोत्सव पर विश्व संवाद केंद्र ने प्रकाश नाम से एक स्मारिका का प्रकाशन किया एवं ‘बिहार में वाहेगुरु’ नाम से एक डाॅक्यूमेंट्री का निर्माण भी किया। इस स्मारिका एवं डाॅक्यूमेंट्री की मांग भारत के अतिरिक्त इंग्लैंड, अमेरिका, कनाडा जैसे देशों में हुई। कुल मिलाकर विश्व संवाद केंद्र का प्रयास है कि बिहार के इतिहास, संस्कृति, पर्यटन, शिक्षा, सिनेमा व पर्यावरण से जुड़े जो भी सकारात्मक पहलु हैं उनको विश्व पटल पर स्थापित किया जाए ताकि प्राचीन विश्व की ज्ञानभूमि बिहार आधुनिक समय में भी विश्व को ज्ञान से परिपूर्ण कर पाये।
धन्यवाद ज्ञापन करते हुए विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष श्रीप्रकाश नारायण सिंह ने कहा कि आज ‘रत्नगर्भा’ के विमोचन के लिए जो लोग आये हैं उनमें कहीं न कहीं पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बोध है। समाज का जो वर्ग अपने प्राकृतिक संपदा को बचाने के लिए संकल्पबद्ध है उसे ‘रत्नगर्भा’ ने एक स्वरूप देने का प्रयास किया है। कार्यक्रम का मंच संचालन विपुल कुमार सिंह ने किया। इस अवसर पर बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव, समाजसेवी एवं विश्व संवाद केंद्र के न्यासी हरिशंकर शर्मा, न्यासी विमल जैन, वरिष्ठ पत्रकार देवेन्द्र मिश्र, कन्हैया भेलारी, प्रवीण बागी, राकेश प्रवीर, कुमार दिनेश, कृष्णकांत ओझा समेत कई पर्यावरणविद् उपस्थित थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published.