पटना, 28 फरवरी। विश्व संवाद केंद्र में पटना के प्रमुख कवियों और गीतकारों ने वसंत काव्य संध्या आयोजित की। इस काव्य संध्या में जीवन के हर पहलु का स्पर्श कवियों ने किया। मधुरेश नारायण जी की कविता ‘हसरत भरी निगाहें, कर रही है तेरा इंतजार…’ में प्रदेश गये संतान के प्रति दर्द छलका।

वहीं तरूण कवियित्री महिमा श्री ने वसंत और प्रेम को स्पर्श किया। ‘ओ वसंत तेरे स्वागत में सिर्फ प्रेम लिखना चाहती हूं…’ में जहां श्रोता प्रेम की गहराईयों को अनुभव कर रहे थे वहीं ‘आदमी यूं हो रहा बदनाम है…’ में आधुनिक मनुष्य को चरित्र को उकेरा गया। वरिष्ठ कवि भगवती शरण द्विवेदी ने कविता की गहराईयों के बारे में बताया और श्रोताओं के समक्ष कविता का मर्म बड़े ही सहज तरीके से प्रस्तुत किया।

गीतकार राजकुमार प्रेमी ने वसंत काव्य संध्या में हास्य का पुट भरते हुए बूढ़ा बाबा के मुंह में दांत नहीं होने की बात बताई। साहित्यकार श्रीकांत व्यास ने ‘मुहब्बत में धोखा खाया हुआ’ शीर्षक गजल का पाठ किया। कवियों और गीतकारों ने हिन्दी, मगही, भोजपुरी इत्यादि भाषाओं में एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी।

युवाओं ने भी खूब लुफ्त उठाया
युवाओं ने भी खूब लुफ्त उठाया

कार्यक्रम की विधिवत शुरूआत प्रख्यात साहित्यकार डॉ. शत्रुघ्न प्रसाद एवं भगवती शरण द्विवेदी ने दीप प्रज्वलन कर किया। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रख्यात साहित्यकार शत्रुघ्न प्रसाद ने पौराणिक होली और आज के होली के बीच तुलनात्मक विवरण अपने काव्य पाठ के माध्यम से किया। कार्यक्रम का मंच संचालन विश्व संवाद केंद्र के संपादक संजीव कुमार ने किया।

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