“उगते हुए सूरज की वंदना, जीवन की ऊष्मा की अर्चना” उक्त पंक्ति वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय डॉ शत्रुघ्न प्रसाद ने विश्व संवाद केंद्र में आयोजित साहित्यकारों की होली मिलन समारोह में कही। अपने उद्बोधन में उन्होंने गाँव और शहर के होली के बदलते स्वरूप पर रोशनी डालते हुए उन्होंने बताया कि गाँव में होली अपने आप आ जाती है। शहर में होली मिलन कार्य्रकम जैसे आयोजन करना पड़ता है।
विशिष्ट अतिथि के तौर उपस्थित वरिष्ठ साहित्यकार भगवती प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि इस तरह की होली मिलन कार्यक्रम से आपसी सद्भावना बढ़ती है।
कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. सतिशराज पुष्करणा ने अपनी गजल को पढ़ते हुए होली में आई अंतर को स्प्ष्ट किया।
मंच संचालन मशहूर शायर नसीम अख्तर ने किया। कार्यक्रम में लेख्य-मंजूषा की अध्यक्ष विभा रानी श्रीवास्तव, आगमन संस्था के सचिव इंजीनियर गणेश जी भागी, प्रांगण संस्था के अध्य्क्ष मधुरेश नारायण, युवा लेखिका महिमा श्री, संजू शरण, इत्यादि उपस्थित थे।

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