पटना, 17 नवंबर। ‘एक सफल संगीतकार की सबसे बड़ी उपलब्धि यही होती है कि उसके द्वारा फिल्मों में दी गयी संगीत को लोग 20-25 साल बाद भी याद रखें’, उक्त बातें फिल्म एवं संगीत समीक्षक धीरेंद्र कुमार तिवारी ने विश्व संवाद केंद्र के सभागार में आयोजित संगीतकार चित्रगुप्त के 101वीं जयंती में कही। चित्रगुप्त के संगीत पक्ष के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा 80 के दशक तक चित्रगुप्त शीर्ष के 10 संगीतकार में गिने जाते थे। उदित नारायण से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए धीरेंद्र कुमार ने कहा, बॉलीवुड को रफी के बदले उदित नारायण तो मिल गया। लेकिन चित्रगुप्त की जगह आज भी बॉलीवुड में खाली है। डबल एम.ए होने के बाद वह मायानगरी में जाकर संगीतकार बने। वाराणसी घराने के एस.एन.त्रिपाठी ने चित्रगुप्त को पहला मौका फिल्म ’सिंदबाद द सेलर’ में दिया। जिसमें चित्रगुप्त ने 4 गानों में अपना संगीत दिया। चित्रगुप्त अपने जीवनकाल में लगभग 150 से अधिक फिल्मो में संगीत दिया। भोजपुरी फिल्मों का जिक्र करते हुए श्री तिवारी ने बताया कि पहली भोजपुरी फिल्म ‘हे गंगा मैया तोहे पियरी चैढ़बो’ का भी संगीत चित्रगुप्त ने दिया था। इस फिल्म के टाइटल सॉन्ग को अपनी आवाज में गाते हुए धीरेंद्र कुमार ने वर्तमान के भोजपुरी फिल्मों पर सवाल भी उठाया। उन्होंने कहा भोजपुरी फिल्म अपने पहचान को खो चुकी है।
इस मौके पर मौजूद चित्रगुप्त जी की परिजन प्रो. अनिता राकेश ने चित्रगुप्त के जीवन संघर्ष के बारे में सभा को बताया। उन्होंने बताया उस दौर में भी मुम्बई फिल्मो में गुटबाजी होती रहती थी। गुटबाजी का शिकार चित्रगुप्त को भी होना पड़ा। उन्होंने परिवार के माहौल के बारे में बताते हुए अनिता राकेश ने कहा, जहाँ संगीत है वहीं साहित्य और कला है।
इस अवसर पर विश्व संवाद केंद्र के सम्पादक संजीव कुमार ने कहा, बिहार से फिल्म जगत में प्रसिद्ध लोगों को सामने लाना हमारा पहला लक्ष्य है। कई प्रतिभा सामने नहीं आ पाती है। गौतम बुद्ध का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया बिहार में ही सही मायने में प्रतिभाओं को मांजा जाता है।
पहले सत्र के खत्म होने के बाद दूसरे सत्र में सन 1957 में बनी फिल्म ‘भाभी’ का प्रदर्शन विश्व संवाद केंद्र के सभागार में हुआ। पाटलिपुत्र सिने सोसाइटी के संजोयक प्रशांत रंजन ने भाभी फिल्म और सोसाइटी की जानकारी दी।
इस मौके पर वरिष्ठ लेखिका महिमा श्री, रंगकर्मी संजय सिन्हा, पत्रकार आनंद कुमार, समाजसेवी हाजी मोहम्मद अफजल इंजीनियर, साहित्यकार श्रीकान्त व्यास, इत्यादि समेत कई सिनेप्रेमी मौजूद थे।

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