मदुरै, 19 जनवरी. विश्व की शांति और समृद्धि के लिए भारत को जागना होगा.  भारत ही एकमात्र देश है जो यह काम कर सकता है. उक्त बातें आद्य्यात्मिक गुरु परमपूज्य श्री श्री रविशंकर ने स्वदेशी जागरण मंच के 13वें अखिल भारतीय सम्मेलन में कहा. तमिलनाडु के मदुरै में उद्घाटन सत्र में रविशंकर जी ने गैरसरकारी संस्थाएं व विदेशी कंपनियों पर विरोध प्रकट करते हुए कहा, ये सभी संस्थाएं अपना–अपना तर्क प्रस्तुत कर के देश की कृषि, उधोग, व्यापर, सेवा व न्यायालय सहित अन्य क्षेत्रों पर प्रशन उठा कर देश पर आघात कर रही है.  देश की उन्नति हेतु स्वदेशी जागरण मंच को ऐसे बिन्दुओं को चिन्हित करना होगा. देशी वस्तुओं को बढ़ावा  देने की बात उन्होंने अपने वक्तव्य में दिया. अपने वक्तव्य को अंत करते हुए उन्होंने युवाओं से अपील की कि देश पर गर्व करने के लिए अपनी संस्कृति पर गर्व करना होगा.

स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय संयोजक अरुण ओझा ने कहा कि डाटा उपनिवेशवाद के रूप में भारत के सामने एक नया खतरा उत्पन्न हो गया है. विकशित देशों के प्रति आग्रह करते हुए उन्होंने बताया कि आज विकसित देश विकासशील देशों से विभिन्न प्रकार के आंकड़े जुटाकर उनका विशलेषण कर उन्हीं को बेच रही है. विकास के वर्तमान मॉडल पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि विकास के नए मॉडल ने जीवन के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया है.

राष्ट्रीय विचार विभाग प्रमुख अजय पत्की ने स्वदेशी जागरण मंच की विकास यात्रा पर अपने विचार रखें. उन्होंने कहा कि स्वदेशी जागरण का यह पहला सम्मेलन है जिसका फेसबुक, ट्विटर, यू-ट्यूब आदि माध्यमों से लाइव टेलीकास्ट की व्यवस्था की गयी है. 13 वें राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के सभी प्रान्तों से 1200 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं. यह सम्मलेन 20 जनवरी तक चलेगा, जिसमे आर्थिक और समसमायिक विषयों के अलावा चीन के साथ होने वाले आरसीईपी समझौता, ई-कॉमर्स, आदि विषयों पर प्रस्ताव भी पारित होंगे.

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