130 करोड़ का आबादी वाला भारत देश कोरोना जैसे वैश्विक महामारी से निपटने के लिए निरंतर प्रयासरत है। केंद्र व राज्य सरकार एवं स्थानीय प्रशासन के दिशा निर्देशों का पालन करते हुए भारत का संपूर्ण समाज अनुशासित, संयमित एवं धैर्य पूर्वक रहते हुए लॉकडाउन का पालन कर अपने अनुशासित जीवन शैली के विशेषता का परिचय दे रहे हैं। वही चंद लोग आज के मसीहा बने चिकित्सकों, नर्सों, स्वास्थ्य कर्मी, सफाईकर्मी एवं पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला व दुर्व्यवहार कर अपने घृणित मानसिकता को दर्शा रहे हैं।
इस वैश्विक महामारी के खिलाफ लड़ने वाले सभी कर्मी जो अपने घर परिवार को छोड़कर अपनी जान की बाजी लगाकर आमजनों की सेवा के लिए लगे हुए हैं। वास्तव में आज के यह लोग ही मसीहा हैं। इनके परिवार में बच्चे हैं, परिवार के सदस्यों की जिम्मेदारी है। लेकिन अपने परिजनों के परवाह किए बिना 24 घंटा कोरोना की लड़ाई में हम भारतवासी स्वस्थ व निरोग रहे इसके लिए प्रयासरत हैं। ये सभी लोग अभिनंदन के पात्र हैं।
बिहार के औरंगाबाद, मुंगेर, मोतिहारी, बेगूसराय, और उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में कोरोना जांच करने गई मेडिकल टीम पर पथराव, मारपीट और जानलेवा हमले की सूचना से देश स्तंभ है। इन जगहों पर कोरोना संक्रमित मरीज मिलने के बाद मेडिकल टीम जांच करने गई थी। वही मुरादाबाद में एक मस्जिद के बाहर से पथराव किया गया, बिहार के औरंगाबाद जिले के गोह प्रखंड के एक गांव में दिल्ली से आये युवक की जांच करने गई टीम को भीड़ ने घेरकर पीटा। हमले में डीएसपी का सिर फट गया, जबकि उनका बॉडीगार्ड, तीन मेडिकल स्टाफ समेत कई जवान बुरी तरह जख्मी हो गए। मेडिकल टीम को निशाना बनाकर जानलेवा हमला करना बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण एवं मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटना है।
ऐसे सभी कृत्य मानवता को, संवेदनाओं को और कोरोना से लड़ाई के प्रति हमारे समर्पण को शर्मसार करते हैं।
इस वैश्विक महामारी के खिलाफ सकारात्मक वातावरण का निर्माण करें घर में रहते हुए लॉकडाउन एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए आम जनों की सेवा में लगे वायरस के खिलाफ लड़ाई में अपने जान जोखिम में डालकर मानवता की सेवा कर रहे इन सभी कर्मियों को सहयोग व अभिनंदन करें।
पप्पू वर्मा
(लेखक पटना विश्वविद्यालय, पटना में सिंडिकेट सदस्य है)

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