पटना (विसंके). बिहार का सीमावर्ती क्षेत्र विशेषकर पूर्णिया प्रमंडल अवैध घुसपैठ के लिए सबसे सुरक्षित बन गया है। आये दिन यहां घुसपैठ की घटनाएं सामने आती रहती है। 2 जनवरी को देर रात एक अमरिकी नागरिक किशनगंज जिले के नेपाल सीमा पर पकड़ा गया। इस अमेरिकी नागरिक को सीमा पार कराने में सहयोग देने के लिए एक भारतीय नागरिक को भी गिरफ्तार किया गया है। अमरिकी नागरिक का नाम कुइकेल लचुमन है। जबकि उसको मदद देने वाला पश्चिम बंगाल के दाजर्लिंग जिले का निवासी शरद राय है।

सीमा सुरक्षा बल को जानकारी मिली कि कुछ लोग अवैध रूप से भारतीय सीमा को पार कर रहे हैं। बल के 41वीं वाहिनी के रामधन जोत ई कंपनी के जवानों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इन दोनों को गिरफ्तार कर लिया। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित पीलर संख्या- 93/3 से ये लोग भारतीय सीमा से नेपाल जा रहे थे। आउट पोस्ट पार्टी के सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोका। इसके बाद उन दोनों से अपना परिचय पत्र दिखाने को कहा गया। कुइकेल ने अमरिका का पासपोर्ट एवं वहां का प्रमाण-पत्र दिखाया। शरद राय के पास भारतीय वोटर कार्ड व आधार कार्ड था। जब दोनों की तलाशी ली गई तो इनके पास से 500 डाॅलर अमरिकी मुद्रा, 5 डाॅलर कनाडा की मुद्रा, भुटान मुद्रा, कई एटीम कार्ड और नेपाली मोबाइल सिम कुइकेल के पास से बरामद हुए।

सीमा सुरक्षा बल के पूछताछ में इस अमेरिकी नागरिक ने बताया कि वह 10 दिसंबर को ही नेपाल से भारत आ गया था। भारत में 22 दिन बिताने के बाद वह पुनः रविावार को अवैध रूप से वापस नेपाल जाने के फिराक में था। इन दोनों व्यक्तियों को गिरफ्तार कर खोरीबाड़ी थाने के हवाले कर दिया गया। इनके खिलाफ 2 जनवरी, 2022 को यू/एस 14/14सी विदेशी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन दोनों को दस दिनों की रिमांड की अर्जी पर सिल्लीगुड़ी कोर्ट में पेश किया गया। जहां कोर्ट ने इन दोनों को सात दिनों के लिए पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

भारतीय जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर क्या कारण है कि नेपाल के रास्ते अक्सर लोग भारतीय सीमा विशेषकर बिहार में प्रवेश करते हैं और कुछ समय बीताने के बाद वापस नेपाल चले जाते हैं। इन घटनाओं पर लगातार नजर रखने वाले पत्रकारों एवं समाजसेवियों का मानना है कि पुलिस अगर गहनता से जांच करे तो मानव तस्करी का एक बड़ा रैकेट सामने आ सकता है।

– संजीव कुमार, विसंके, संपादक 

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