भागलपुर (विसंके)। गणपत राय सलारपुरिया सरस्वती विद्या मंदिर नरगाकोठी के प्रांगण में चल रहे दो दिवसीय शिक्षक-प्रशिक्षक कार्यशाला आज संपन्न हो गया। इस दौरान विद्यालय के प्रधानाचार्य रामजी प्रसाद सिन्हा, कहलगांव के प्रधानाचार्य विमल पांडे, बौंसी के प्रधानाचार्य संजीव झा एवं भागलपुर विभाग के विभाग सह प्रमुख विनोद कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

कार्यक्रम में मौजूद रामजी प्रसाद सिन्हा ने कहा कि वास्तव में शिक्षा ज्ञान, चरित्र एवं संस्कृति की त्रिवेणी है जिससे जीवन तीर्थराज बनता है। संयम, शील एवं संस्कार का उन्नयन कर संस्कृति शिक्षा के लक्षणों को समुन्नत  करती है। शिक्षक का कार्य दोषों से आच्छादित बुद्धि को परिमार्जित करना है। बालक का सर्वांगीण विकास ही शिक्षा की धूरी है। शिक्षण के लिए बच्चे नहीं हैं बल्कि बच्चों के लिए शिक्षण है।

वहीँ कार्यक्रम में मौजूद आनंदराम के प्रधानाचार्य अनंत कुमार सिन्हा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के द्वारा नई पीढ़ी के छात्रों को अधिक शिक्षा सामग्री प्रदान किया जाएगा जिससे छात्रों को बेहतर शिक्षा प्रदान की जा सके। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में प्रदान की जाने वाली शिक्षा को वैश्विक स्तर पर लाना है। शिक्षा को लचीला बनाते हुए बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ना है।

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भागलपुर विभाग के विभाग सह प्रमुख विनोद कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत छात्रों को मूल्य आधारित समावेशी शिक्षा प्रदान की जाएगी, उनके वैज्ञानिक मिजाज को विकसित किया जाएगा तथा उन्हें कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस एजुकेशन पॉलिसी के माध्यम से अब भारत के छात्र भी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर पाएंगे।

कार्यक्रम में राजेश कुमार, राजीव शुक्ला, लव त्रिपाठी, शैलेंद्र तिवारी, संजीव झा, सरिता कुमारी ने भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर अपने विचार रखे।

मंच संचालन बौंसी के प्रधानाचार्य संजीव झा द्वारा किया गया।

इस अवसर पर विनोद कुमार, रामजी प्रसाद सिन्हा, अनंत कुमार सिन्हा, राजेश नन्दन, अजीत कुमार, केशव कुमार मिश्र, विमल पांडे, जितेंद्र प्रसाद, संतोष आनन्द, आकाश कुमार, अजय कुमार, दीपक कुमार, अभिजीत आचार्य, सुमित रौशन, शशि भूषण मिश्र एवं भागलपुर विभाग से आए लगभग 80 प्रतिभागी उपस्थित थे।

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