तारा शंकर बंदोपध्याय- 14 सितंबर पुण्यतिथि
पटना, 14 सितम्बर। बंगाली उपन्यासकार एवं लेखक तारा शंकर बंदोपध्याय का जन्म 23 जुलाई 1898 को लाभपुर पश्चिम बंगाल में हुआ था। 1916 में लाभपुर से मैट्रिक की परीक्षा पास की। इसी वर्ष इनकी शादी उमाशशी देवी से हुआ। जब तारा शंकर इण्टरमीडिएट में थे तब भारत में असहयोग आंदोलन चल रहा था, गांधी जी के विचारों के प्रभावित होने के कारण ताराशंकर ने इस आंदोलन में भाग लिया। वर्तमान आशुतोष काॅलेज से डिग्री ली। स्वतत्रता आंदोलनों में सक्रिय भूमिका के कारण इनको जेल भी जाना पड़ा। ये बंगला भाषा के अग्रणी लेखक एवं उपन्यासकार थे। ताराशंकर बंदोपध्याय ने 65 उपन्यास, 53 कहाॅनियों कि किताबें, 12 नाटक, 4 आत्मकथा, 2 यात्रावृतांत इत्यादि लिखें। ना, नागरिक, जंगल घर, गणदेवता, कवि, संदीपन पाठशाला ,विचित्र इत्यादि इनके उपन्यास है। त्रिपत्र नाम से इन्होंने कविता भी लिखी है। 1947 में इन्होंने प्रवासी बंग साहित्य सम्मेलन, कोलकाता में आयोजित कराई। 1952 में विधानसभा के लिए चुने गए। 1955 में बंगाल सरकार द्वारा रविंद्र नाथ टैगौर के नाम पर दिए जाने वाले रविंद्र पुरस्कार से नवाजे गए। 1956 में साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया। संयुक्त राष्ट्र में एशिया-अफ्रिका के लेखकों के संगठन में भाग लिया। इसके कुछ समय बाद एशिया-अफ्रिका लेखकों के भारतीय दल का नेतृत्व किया। 1959 में कोलकाता विश्वविद्यालय द्वारा जगततारिणी गोल्ड मेडल दिया गया। इसी वर्ष इन्होंने आम्रपाली नाम से फिचर फिल्म का निर्देशन भी किया। 1960-66 तक राज्य सभा के सदस्य रहे। 1962 में पद्य श्री, 1966 मेंज्ञानपीठ एवं 1969 में पद्य भुषण पुरस्कारों से नवाजे गए। कोलकाता एवंजाधवपुर विश्वविद्यालय द्वारा ताराशंकर को डाॅक्ट्रेट की उपाधि दी गई। 14 सितंबर 1971 को 73 वर्ष की आयु में कोलकाता में इनका निधन हो गया।

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