सासाराम, 14 दिसंबर। c के प्रथम बलिदानी वीर बालक बाबू गेनूजी का बलिदान दिवस, स्वदेशी दिवस के रूप मनाया गया। यह कार्यक्रम स्वदेशी जागरण मंच, सासाराम स्थित कार्यालय पर मनाया गया। मौके पर स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय परिषद् के सदस्य मुकुल रंजन ने कहा कि 12 दिसंबर 1930 को भारत के स्वदेशी आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण दिन था। इस दिन बाबू गेनू ने स्वदेशी के लिए अपना बलिदान दिया था। लोकमान्य गंगाधर तिलक, महात्मा गांधी के स्वदेशी और बहिष्कार के आंदोलन से प्रेरित होकर विदेश वस्त्रों से भरी लॉरी को रोकते हुए शहीद हो गए।
अंग्रेजों की इस कुटिल अर्थनीति को विफल करने के लिए लोकमान्य गंगाधर तिलक व महात्मा गांधी ने स्वदेशी अपनाने और विदेशी मॉल का बहिष्कार करने का अभियान चलाया। बाबू गेनू ने इसमें पूरी शक्ति से भाग लिया। इस अवसर पर स्वदेशी जागरण मंच के कई कार्यकर्त्ता उपस्थित थे।

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