सरस्वती शिशु मंदिर, बेकापुर, मुंगेर में युवाओं एवं भारतीय संस्कृति के दिर्गदर्शक स्वामी विवेकानन्द की 158 वी जन्म-जयंती पूर्व छात्र सम्मेलन के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन नीरज कुमार कौशिक, अशोक सितरिया, प्रेम कुमार वर्मा एवं जयन्त चौधरी ने संयुक्त रूप से पुष्पार्जन एवं दीप प्रज्जवलन कर किया।
नीरज कुमार कौशिक ने बताया कि विद्या भारती के कार्यो को फैलाने का कार्य हमारे पूर्व छात्र ही कर रहे है। जिसके बल पर विद्या भारती विश्व का सबसे बड़ा शैक्षणिक संस्थान उभर कर सामने आया है। स्वामी विवेकानन्द ने कहा है ” किसी भी देश का विकास शिक्षा एवं युवा शक्ति पर निर्भर करता है!” युवा शक्ति ही किसी समाज का ‘कल आज और कल’ का प्रतीक होता है।
जयंत चौधरी ने बताया कि शिक्षक का धन पूर्व छात्र ही होता है। अतः उसे गुरु, विद्यालय और समाज के प्रति ईमानदार बने रहना चाहिए।

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पूर्व छात्र के नाते मधुसूदन आत्मीय, डॉ0 प्राण मोहन केसरी , जय किशोर पाठक, अतुल, श्वेता, सौरभ, श्रुति, नम्रता, अशोक सितारिया ने अपने विचारों में विद्यालय के शिष्टाचार, अनुशासन, व्यवहार कुशलता, शिक्षण पद्दति को अपने जीवन का आधार बताया जिसे बचपन में उन्होंने प्राप्त किया।
प्रेम कुमार वर्मा ने कहा कि यह विद्यालय समाज के लिए वरदान बना रहा और भविष्य में भी आने वाली पीढी के लिए मार्गदर्शक बना रहेगा। करीब 100 पूर्व छात्रों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम की भव्यता बढ़ाई। पूर्व छात्र परिषद का पुनर्गठन किया गया।

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