देश के विकास के लिए तकनीक का होना अति आवश्यक है। चंद्रयान-2 को अंतरिक्ष में भेज कर भारत ने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। हम धरती से निकलकर दूसरे ग्रह/उपग्रह में जाकर काम कर रहे हैं। इसरो अपने पांव पर खड़े होकर अंतरिक्ष के क्षेत्र में कार्य किया है। इससे विश्व में भारत की पहचान बनी है। उक्त बातें भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला में लंबे समय तक कार्य कर चुके इसरो के वैज्ञानिक डॉ0 राजमल जैन ने सरस्वती विद्या मंदिर, मुंगेर में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं में काफी प्रतिभा है। इसे सिर्फ प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।

सेटेलाइट की उपयोगिता पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि चांद पर विभिन्न तरह के तत्व की खोज करने तथा आपदा की पूर्व सूचना में भी इससे मदद मिलेगी। सूर्य में घटित घटनाक्रम का प्रभाव भी पृथ्वी पर पड़ता है। इसके पूर्व उन्होंने भारत के महान वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के अंतरिक्ष के क्षेत्र में किए गए महत्वपूर्ण योगदानों की चर्चा करते हुए अंतरिक्ष विज्ञान के अनुसंधानों एवं अनुभवों को साझा करते हुए चंद्रयान -2 के कार्य प्रणाली और उसकी उपयोगिता की चर्चा की।

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कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष निर्मल कुमार जालान, प्रोफेसर के. एन. राय ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया। अतिथि परिचय सह सम्मान प्रधानाचार्य नीरज कुमार कौशिक ने किया वहीं कार्यक्रम का संचालन आचार्य अरुण कुमार ने किया।

इस अवसर पर उपप्रधानाचार्य उज्जवल किशोर सिन्हा, क्षेत्रीय बालिका शिक्षा संयोजिका कीर्ति रश्मि,  प्रांतीय सोशल मीडिया प्रमुख संतोष कुमार, विद्यालय के मीडिया प्रमुख मुकेश कुमार सिन्हा, नरेश कुमार पहुजा सहित विद्यालय के समस्त आचार्य उपस्थित थे।

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