मुंगेर, 30 अगस्त। रुचि के साथ कार्य के प्रति लगन और सक्रियता ही वैज्ञानिक सोच का आधार है। वैज्ञानिक विकास के साथ-साथ हमारे नैतिक मूल्यों का हास न हो तभी विज्ञान की उपयोगिता एवं सार्थकता सम्भब है। उक्त बातें सरस्वती विद्या मंदिर, मुंगेर के सभागार में ‘वैज्ञानिक सोच का विकास’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय संकुल स्तरीय कार्यक्रम में मुख्य अतिथि आर.डी.एण्ड.डी.जे. कॉलेज के प्रोफेसर गोपाल प्रसाद चौधरी ने कहा। उन्होंने कहा कि अपने सोच का कार्यान्वित करना ही विज्ञान है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विद्या भारती उत्तर-पूर्व क्षेत्र के क्षेत्रीय मंत्री डॉ. कमल किशोर सिन्हा ने कहा कि आज का युग विज्ञान का युग है। विज्ञान के कारण आज हर क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है और भारत सदियों से ज्ञान का केंद्र रहा है।
वही प्रधानाचार्य नीरज कुमार कौशिक ने कहा कि जीवन की सार्थकता तभी है जब हमारी सोच पूर्ण वैज्ञानिक हो। हमारी सोच नई-नई खोज करने के लिए बाध्य करती हो। सोच के साथ प्रयोगात्मक रूप से सत्यता की खोज करना भी आवश्यक होता है तभी विज्ञान की प्रमाणिकता सिद्ध होगी।
कार्यक्रम को आचार्य पाणिनि मिश्रा, आर.डी.एण्ड.डी.जे. कॉलेज के प्रोफेसर सूरज कोनार, आचार्य अनंत कुमार सिन्हा ने भी संबोधित किया।
वहीं बहन दीक्षा ने एकल गीत गाकर कार्यक्रम में चार चांद लाया, धन्यवाद ज्ञापन आचार्य विजय कुमार मंडल द्वारा किया गया और मंच संचालन आचार्य गोपालकृष्ण ने किया।
इस अवसर पर प्रान्त के प्रचार प्रमुख संतोष कुमार, विभागीय संवाददाता निवास झा, विद्यालय संवाददाता मुकेश कुमार सिन्हा सहित समस्त भैया-बहन एवं आचार्य उपस्थिय थे।

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