पूरनमल सावित्री देवी बाजोरिया सरस्वती शिशु मंदिर एवं गणपत राय सलारपुरिया सरस्वती विद्या मंदिर, नरगाकोठी में आयोजित त्रिदिवसीय आचार्य कार्यशाला का दूसरे दिन आज समाप्त हो गया है। आज का कार्यशाला पाँच सत्रों में सम्पन्न हुआ जिसमें शैक्षिक उत्कृष्टता, आदर्श पाठ योजना, पंचपदी शिक्षण पद्धति, संस्कृति बोध परियोजना का क्रियान्वयन, आधारभूत विषय, पूर्व छात्र परिषद्, विद्वत् परिषद पर विस्तृत रूप से चर्चा की गयी।

कार्यशाला में प्रदेश सचिव गोपेश घोष ने कहा कि शिक्षा संस्कृति से जुड़ी होनी चाहिए। पूर्व योजना अच्छी बात है किन्तु पूर्ण योजना होनी चाहिए। शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने वाले व्यक्ति को शिक्षा का दर्शन होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि धैर्य, सहिष्णुता, विनम्रता से विचार कर बालकों को शिक्षा प्रदान करनी चाहिए। बालकों में शिक्षा, संस्कार एवं सामाजिक विचारों का विकास हो। शिक्षण की पूरी प्रक्रिया अभिप्रेरणा है। आचार्य को वार्षिक कार्य योजना बनाकर उसे पूर्ण करना चाहिए।

वही रामजी प्रसाद सिन्हा ने कहा कि कार्यशाला का अर्थ है कार्य के विभिन्न आयामों को कार्यरूप देना। विकास की प्रक्रिया शाश्वत एवं प्रकृति प्रदत्त है जो अपने भीतर झांकने की आवश्यकता है।

त्रिदिवसीय आचार्य कार्यशाला के दूसरे दिन का उद्घाटन प्रदेश सचिव गोपेष घोष, विद्या मंदिर प्रधानाचार्य रामजी प्रसाद सिन्हा,शिशु मंदिर प्रधानाचार्य अजीत कुमार, आनंद राम ढांढनिया के प्रधानाचार्य मनोज मिश्र एवं  उप प्रधानाचार्य अशोक मिश्र ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

इस अवसर पर शेखर झा, डॉ संजीव झा, अभिमन्यु कुमार, वेद प्रकाश, डॉ संजीव ठाकुर, मनोज तिवारी, शशिभूषण मिश्र, अमर ज्योति, अभिजित आचार्य, अनिल मिश्र, अमरेन्र्द कुमार, उत्तम मिश्र, नरेन्द्र कुमार, सविता कुमारी, ज्योति कुमारी, अंजू रानी, कविता पाठक, लिली, ललिता झा, एवं शिशु मंदिर/विद्या मंदिर के सभी आचार्य उपस्थित थे।

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