भागलपुर, 8 सितम्बर। पूरनमल सावित्री देवी बाजोरिया सरस्वती शिशु मंदिर नरगाकोठी के प्रांगण में विद्यालय स्तरीय खेल दिवस मनाया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन विद्यालय के  उपाध्यक्ष डॉ मधुसूदन झा एवं प्रधानाचार्य अजीत कुमार द्वारा किया गया।

डॉ मधुसूदन झा ने कहा कि खेलना एक स्वाभाविक क्रिया है। शरीर के लिए नियमित खेल आवश्यक है। खेल से बालक को आनंद व आराम मिलता है। खेल की गतिविधियाँ बालक के विकास तथा वृद्धि में सीधा प्रभाव डालती है। आधुनिक काल में शिक्षा के क्षेत्र में खेलों को निरंतर महत्व मिल रहा है। बालक को खेल द्वारा नियमित एवं अनुशासित किया जा सकता है।

प्रधानाचार्य अजीत कुमार ने कहा कि विद्या भारती के पाठ्यक्रम में शिक्षा के साथ-साथ राष्ट्रीय खेल,योग,आसन,स्वास्थ्य शिक्षा,संगीता शिक्षा आदि विषयों को भी स्थान दिया है। शारीरिक शिक्षा का अर्थ है शरीर को शिक्षित करना तथा शरीर के विज्ञान का ज्ञान करना।शारीरिक शिक्षा द्वारा शरीर और मस्तिष्क को मजबूत एवं स्वस्थ्य रखा जाता है। खेल की समस्त क्रियाओं द्वारा हमारा दिमाग एवं शरीर दोनों स्वस्थ रहते हैं।

खेल प्रमुख शशिभूषण मिश्र द्वारा खेल के नियमों को बताते हुए कहा कि प्रत्येक परिस्थिति में साहस, संयम एवं धैर्य को स्थिर बनाये रखना है। खेल के माध्यम से अपने नेतृत्व गुणों का विकास करना है दृढ़ इच्छाशक्ति का विकास करना है। आज के खेल में अपना स्थान प्राप्त कर 27.09.2018 से होने वाली प्रांतीय एथलेटिक्स राजगीर में भाग लेकर अपना स्थान बनाए रखने के लिए प्रयासरत रहना है

कक्षा तृतीय से पंचम तक के लगभग 200 भैया और बहनों ने कबड्डी,दौड़,ऊँची कूद,लम्बी कूद एवं गोला फेंक प्रतियोगिता में भाग लिया।

इस अवसर पर मनोज तिवारी, अमर ज्योति,नरेन्द्र कुमार,विक्रम प्रसाद राय,राजेश कुमार,शशि कांत गुप्ता,सुबोध ठाकुर,गोपाल सिंह,अभिजित् कुमार,उपेन्द्र प्रासाद साह,अंजू रानी,कविता पाठक,ललिता झा,रेणु कुमारी एवं समस्त आचार्य उपस्थित थे।

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