नालंदा, 20  नवम्बर। बख्तियार खिलजी के नाम पर बख्तियारपुर स्टेशन का नाम बदलने की दिशा में संघर्ष शुरू हो गया है। नालंदा खंडहर स्थित नालंदा महाविहार के 67 वां स्थापना दिवस समारोह धूमधाम से मनाया गया। स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित अखिल भारतीय इतिहास संकलन समिति के राष्ट्रीय संगठन सचिव व प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ बालमुकुंद पांडे ने कहा कि बख्तियारपुर स्टेशन का नाम जिस आक्रामक शासक बख्तियार खिलजी के नाम पर रखा गया है वह बिल्कुल गलत है।
इस प्रकार के किसी भी क्रूर शासक के नाम पर कोई भी स्थान भारत में रहना प्रतीक चिन्ह रखना भारत के अस्मिता को अपमानित करने के बराबर है। भारत में जितने भी इस तरह के क्रूर शासक के नाम पर नाम व प्रतीक चिन्ह रखा गया है इसे अविलंब भारत सरकार को बदल देना चाहिए।
यह बदलाव बहुत पहले हो गया होता लेकिन पंडित जवाहरलाल नेहरू की ढुलमुल नीति के कारण यह न हो सका। जब अंग्रेजों के सारे मूर्तियों को भारत से उखाड़ फेंके गए तो फिर इन अपमान के चिन्हों को अब तक भारत में क्यों रखा गया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या नालंदा से ज्यादा महत्वपूर्ण हमारे लिए बख्तियार खिलजी है। जिसके नाम पर बख्तियारपुर स्टेशन का नाम रखा गया है।

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