नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत जी द्वारा पुस्तक विमोचन की एक पुरानी फोटो का उपयोग कर सोशल मीडिया पर झूठ फैलाया जा रहा है. वर्ष 2014 के कार्यक्रम की एक फोटो के साथ दावा किया जा रहा है कि मोहन भागवत ने अलग-अलग जातियों के लिए पुस्तकें लिखवाई जा रही हैं, और जैसे ही यह काम पूरा हो जाएगा, मनु स्मृति को लागू कर दिया जाएगा. पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अलग-अलग जातियों को ट्रेनिंग देना भी शुरू कर दिया है, जैसे नाई है तो नाई की ट्रेनिंग और बढ़ई है तो बढ़ई की ट्रेनिंग, लोग अपनी जाति के अलावा अन्य काम नहीं कर पाएंगे.
वास्तव में सरसंघचालक की जिस फोटो का उपयोग कर यह सब दावे किए जा रहे हैं, वह छह साल पुरानी है. फोटो सितंबर 2014 में आयोजित पुस्तक विमोचन कार्यक्रम की है. मोहन भागवत ने भाजपा प्रवक्ता डॉ. बिजय सोनकर शास्त्री द्वारा लिखित पुस्तकों का विमोचन किया था, और फोटो में दिख रही पुस्तकें उन्होंने ही लिखी थीं. यह जानकारी डॉ. बिजय सोनकर शास्त्री की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है. कार्यक्रम में स्व. अशोक सिंघल, केंद्रीय मत्री स्मृति ईरानी, प्रकाश जावड़ेकर सहित अन्य लोग उपस्थित थे.

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डॉ. बिजय शास्त्री लंबे समय से सामाजिक व राजनीतिक जीवन में सक्रिय हैं तथा उन्होंने अनेक पुस्तकें लिखी हैं. इनमें से अधिकांश दलित आंदोलनों व दलित अधिकारों पर हैं. वे दलित आंदोलन नाम से एक पत्रिका का प्रकाशन भी करते हैं तथा उसके एडिटर इन चीफ हैं. ऐसे में यह संभव नहीं कि उनके स्तर व्यक्ति मोहन भागवत के कहने पर पुस्तकें लिखे. डॉ. बिजय सोनकर शास्त्री ने इन पुस्तकों (हिन्दू खटीक जाति, हिन्दू चर्मकार जाति, हिन्दू वाल्मीकि जाति) में खटीक, वाल्मीकि एवं चर्मकार जातियों के सृजन के ऐतिहासिक कारणों तथा वर्तमान में समाज में स्थिति का विश्लेषण किया है. उन्होंने पुस्तक में लिखा है कि वास्तव में तीनों जातियां ब्राह्मण और क्षत्रियों के ही वंशज हैं.वे योद्धा और गर्वित हिन्दू थे. इन लोगों ने विदेशी आक्रमणकारियों के समक्ष झुकने से इनकार कर दिया. इस कारण इन लोगों को आक्रमणकारियों द्वारा दबाया-कुचला गया तथा समाज में निम्न दर्जे का काम देकर प्रताड़ित किया गया.
सरसंघचालक मोहन भागवत ने कार्यक्रम में कहा था कि समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त करना इस वर्ग का अधिकार है. उच्च वर्ग को उनकी सहायता करनी चाहिए, क्योंकि वे हमारे ही बंधु हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि संघ दलितों को आरक्षण के समर्थन में है. इन लोगों ने हजार वर्षों तक कष्ट झेला है, अगर हमें उनकी सहायता कर कुछ समय के लिए कष्ट झेलना पड़ता है तो यह प्रसन्नता से करना चाहिए.
उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि सोशल मीडिया में जानबूझकर फैलाई जा रही कहानी झूठ है, मोहन भागवत किसी से पुस्तकें नहीं लिखवा रहे हैं, और न ही मनु स्मृति को लागू करना चाहते हैं. सोशल मीडिया पर यह पोस्ट साजिश के तहत हिन्दू समाज में विघटन पैदा करने के लिए फैलाई जा रही है. विघटनकारी शक्तियों ने जानबूझकर 2014 के कार्यक्रम की फोटो का उपयोग किया, जिससे कोई व्यक्ति इसकी सत्यता को आसानी से न जान पाए.


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