पटना, 15  सितम्बर। एम. विश्वासरैया का पूरा नाम मोक्षगुंडम  विश्वश्वरैया है। जब वे 12 साल के थे, तभी उनके पिता श्रीनिवास शास्त्री जो कि (एक सांस्कृत के विद्वान एवं आयुर्वेदिक शिक्षक थे) उनका निधन हो गया। विश्वासरैया का जन्म 15 सितंबर 1860 को हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा उनके जन्म स्थान कोलार जिला के चिक्कबल्लापुर में स्थित एक प्राइमरी स्कूल में सम्पन्न हुई।
इन्हें आधुनिक भारत के निर्माण के लिए जाना जाता है। अपने प्राइमरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद  उन्होंने बैंगलोर के सेंट्रल कॉलेज में दाखिला लिया। सन 1883 की एलसीई एवं एफसीई  परीक्षा में प्रथम स्थान लाने के बाद उनकी योग्यता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने नासिक में इन्हें सहायक इंजीनियर के पद पर नियुक्त कर दिया। इन्होनें अपने योग्यता से अनेको परियोजनाओं के रूप- रेखा तैयार किए। 1909 में मैसूर राज्य के मुख्य अभियंता भी नियुक्त हुए। इन्होंने ही ‘इकोनॉमिक कॉन्फ्रेंस’ के गठन का सुझाव दिया। इनको मैसूर के कृष्णराजा बांध का भी निर्माण कराया जिससे इनके योगदान से खुश होकर मैसूर राज्य के महाराज ने 1912 में इन्हें राज्य का दीवान अर्थात मुख्यमंत्री भी बनाया था। 1918 में मैसूर के दीवान के रूप में सेवानिवृत्त हो गए। सेवानिवृत्त के बाद भी सक्रिय रूप से कार्य करते रहने के कारण  इनके योगदान को देखते हुए 1955 में भारत सरकार ने इन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया। उत्कृष्ट अभियंता एवं राजनायिक एम. विश्वसरैया जब 100 साल के हुए तब इनके सम्मान में भारत सरकार ने डाक टिकट जारी किया। 101 साल की उम्र में 14 अप्रैल 1962 को इनका निधन हो गया। इन्ही के याद में 15 सितम्बर को अभियंता दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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