1.रघु जुसब कोली 2.वालजी जुसब कोली 3.कल्पेश इब्राहीम कोली 4. आयशा इब्राहीम कोली उपरोक्त सभी नाम पढ़कर आप सोचेंगे की इसमें नया क्या है ? तो आइये अब समझते है इस प्रेरक प्रकरण को.
दिनांक 20 जनवरी 2021 के दिन भुज विश्वविद्यालय विस्तार के पास हरीपर गांव में निधि एकत्रीकरण का पूर्व आयोजित कार्यक्रम अनुसार स्वयंसेवको के साथ गाव में घर घर निधि एकत्रीकरण कर रहे थे, शाम होते ही अँधेरा फैलने लगा गांव के अन्य रामसेवको ने कहा की गांव के सभी घरों का समावेश हो गया है, तभी गांव के छोर पर एक मस्जिद के बगल में दो कुटिया नजर आई, मैंने कहा चलो चलते है. मेरे साथ आये स्थानिक युवक ने मुझे कहा वहां जाना उचित नहीं है, मैंने कहा चलो देखे क्या है? उसके बाद जो प्रसंग हुआ वो रोमांचित करने वाला है.
हमारे जय श्री राम कहने के साथ ही एक बड़ी उम्र की माता ने जय श्री राम बोलकर उत्तर दिया और बोले, की जैसे माँ शबरी राम के आगमन की प्रतीक्षा कर रही थी, उसी प्रकार मैं भी रामभक्तो के आगमन की प्रतीक्षा कर रही थी, फिर हमने राम मंदिर निर्माण के विषय की जानकारी और विस्तार के साथ चर्चा की, तब उनके जो खुशी के जो भाव थे उसे वर्णित करने में निसंदेह शब्द पूरक नहीं होंगे,
उन्होंने कहा की हमारे घर तक मंदिर के लिए कोई दान लेने आया हो उनमे आप प्रथम है, हमे आनंद इस बात का है, की आप ने हमे अपना समझा है, जैसे भगवान राम शबरी के झूठे बेर खाए उससे माता शबरी को जो खुशी मिली उतनी ही ख़ुशी आज मुझे हो रही है. उसके बाद अनायास ही मैं उनसे पूछ भैठा आप हिन्दू धर्म के विषय में इतना जानते है तो फिर ये इस्लामिक नाम क्यों ? तो उनका उत्तर था हमारे पूर्वजो ने गलती की है उसका हमें खेद है उसके बाद दूसरी अनेको बातें हुई जो रोमांचित करने वाली थी अंत में मैंने निधि लिखाने को कहा।
उनके घर में जितने भी सदस्य थे उन सभी के नाम पर 200-200 रूपये लिखवाये तो मैंने कहा की घर एक है तो एक साथ ही लिखाये, इसपर उनका उत्तर भी आकर्षित और रोमांचित करनेवाला था, उन्होंने कहा की “हम तो आप के साथ आज तक नहीं जुड़ सके, लेकिन ये छोटी उम्र के बच्चे हिन्दू धर्म के साथ जुड़े रहे और श्रीराम के प्रति उनका भाव जुड़े वह महत्वपूर्ण है, उन वृद्ध आयशा बहन के शब्दों को सुनकर हम सभी स्वयंसेवक रोमांचित हो गए और अन्त में दोबारा मिलने के आश्वासन के साथ जय श्री राम कहकर विदा ली।

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