सार्वजनिक प्रतिष्ठानों के निजी करण, वैश्वीकरण करने के विरोध में शुक्रवार को बरौनी रिफाइनरी गेट नंबर 1 के मुख्य द्वार के समक्ष एक दिवसीय धरना का आयोजन किया गया. जिसकी अध्यक्षता श्रमिक विकास परिषद के अध्यक्ष रविशंकर प्रसाद ने किया तथा संचालन बरौनी खाद प्रतिष्ठान मज़दूर संघ के महामंत्री रामकुमार महर्षि ने किया.
बरौनी रिफाइनरी के कर्मचारियों एवं मजदूरों को संबोधित करते हुए भारतीय मजदूर संघ के जिला मंत्री सह अखिल भारतीय कंस्ट्रक्शन मजदूर संघ के राष्ट्रीय मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि भारत सरकार वर्तमान परिस्थिति में सार्वजनिक प्रतिष्ठानों के निजीकरण करने का काम कर रही है जो आम जनता के हित में बहुत ही घातक है. अगर निजीकरण, वैश्वीकरण का दौर जारी रहा तो साधारण लोगों के बच्चे ना तो अच्छे अस्पताल में अपना इलाज करवा सकते हैं और ना तो उन्हें अच्छी शिक्षा ही मिल सकती है. दुःखद यह है कि अधिकांश सार्वजनिक औद्योगिक प्रतिष्ठान निजी हाथों में बेचा जा रहा है. बैंकों का निजीकरण किया जा रहा है, रेल को भी निजी क्षेत्रों में देने की साजिश चल रही है, जिसे भारतीय मजदूर संघ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी. अपने व्यक्तव में उन्होंने आगे कहा कि देश में 257 पब्लिक सेक्टर में 2273969 करोड़ श्रमिकों को लाभ मिलता है. 278610 करोड़ की सार्वजनिक संपत्ति को सरकार ने निजी कंपनियों के हाथों बेचा है जिसका आंकड़ा सरकार ने खुद पेश किया है. अभी तो प्रथम चरण में सिर्फ ये झांकी है संघ आगे पूरे देश में आंदोलन तेज कर आम लोगों के हितों की रक्षा करते हुए श्रमिकों की हक की रक्षा करेगी.
श्रमिक विकास परिषद सम्बद्ध भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री प्रमोद राम ने धरना को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का विकास तभी संभव है जब रोजगार के अवसर पैदा होंगे लेकिन जब कंपनियों को पूंजीपतियों के हाथों में सौंप दिया जाएगा तो मजदूरों का हित संभव नहीं है.

श्रमिक विकास परिषद के उपाध्यक्ष शंकर सिंह ने कहा कि श्रमिक विकास परिषद भारतीय मजदूर संघ की एक मजबूत इकाई है इसलिए बरौनी रिफाइनरी में भी हमें मजदूर हितों को ध्यान में रखते हुए हमेशा संघर्ष करना होगा. मजदूर हितों में ईएसआई अस्पताल की स्थापना के लिए आ रही कठिनाइयों को दूर करना होगा.

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