मोतिहारी, 18 अगस्त. बोलने और लिखने की आजादी सभी को सामान रूप से मिली है, इस विषय में कोई अतिश्योक्ति नहीं, यह हमारे संविधान के अनुच्छेद 19 (क) में जनता को अधिकार भी दिया गया है. लेकिन संविधान के अनुच्छेद 19 (ख) को भी लोगों को ध्यान में रखना आवश्यक हो जाता है तब जब हम बोलने और लिखने की बात संविधान के दायरे में कर कर करते है.

एक ओर जहाँ 17 अगस्त को बिहार ही नहीं बल्कि विश्व के कई देश भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के शोक में डूबा हुआ था. कई देशों के राष्ट्रध्वज अटल जी के सम्मान में झुका हुआ था. वही मोतिहारी स्थित केन्द्रीय विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर संजय कुमार ने अपनी तुच्छ मानसिकता और अपने दायित्वों को दरकिनार कर अजातशत्रु जैसे पूर्व प्रधानमंत्री पर ओच्छि टिप्पणी कर डाली. इससे पहले भी संजय लिख चुके है कि भारतीय फासीवाद का एक युग समाप्त हुआ. यह देख स्थानीय अटल प्रेमी को रहा नहीं गया और अपने प्रिय नेता का अपमान देख उनकी मरम्मत कर दी. इस घटना की सुचना पुलिस को दी गई. घटना निंदनीय है और वामियों का असली चेहरा उजागर करता है.

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