पटना, 14 जनवरी। देश के जाने माने इतिहासकार, वरिष्ठ पत्रकार, स्तम्भकार व संघ विचारक देवेन्द्र स्वरूप का आज (सोमवार) शाम निधन हो गया। वे 93 वर्ष के थे। वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। स्वांस लेने में तकलीफ होने के चलते उन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया था। उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली (वेंटीलेटर) पर रखा गया था। जहाँ सोमवार की शाम उन्होंने अंतिम श्वांस ली। देवेन्द्र स्वरूप ने अपने जीवनकाल में ही देहदान की घोषणा की थी। इसलिए मंगलवार उनके अंतिम दर्शन के पश्चात उनकी पार्थिव देह को चिकित्सकीय शोध के लिए दान कर दिया जाएगा।

देवेन्द्र स्वरूप एक समय में संघ के प्रचारक रहे देवेन्द्र स्वरूप को द्वितीय सरसंघचालक गुरूजी से लेकर निवर्तमान सरसंघचालक सुदर्शन जी का बहुत सान्निध्य व स्नेह प्राप्त था। वे राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय रहे भाऊराव देवरस के भी अत्यंत निकट थे। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ पांचजन्य का संपादन भी किया था। इसके बावजूद वे प्रयत्नपूर्वक राजनीतिक क्षेत्र से दूर रहे। देवेन्द्र स्वरूप गहन अध्येता व इतिहासकार होने के साथ ही संविधान रचना के भी जानकार थे। उनके निजी संकलन में ही 15 हजार से अधिक पुस्तकें थीं, जो उन्होंने अस्वस्थ होने के बाद आईजीएनसीए के ग्रंथागार को भेंट कर दीं। अनेक विषयों पर कुल मिलाकर डेढ़ दर्जन से अधिक पुस्तकें लिखीं थीं।

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