पटना (विसंके). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ किसी जाति को मान्यता नहीं देता. एक प्रशन के उत्तर में संघ के दुसरे सरसंघचालक माधवराव गोलवलकर (गुरूजी) जी ने स्पस्ट किया था. उन्होंने संघ के दृष्टिकोण को स्पस्ट करते हुए कहा कि संघ के समक्ष प्रत्येक व्यक्ति हिंदू है. जाति अपने समय में एक महान संस्था थी, किंतु आज वह देश – कालबाह्य है. जो लचीला न हो वह शीघ्र ही प्रस्तरित (विपस) वस्तु बन जाता है. मैं चाहता हूँ कि अस्पृश्यता कानूनी रूप से ही नहीं प्रत्यक्ष रूप से भी समाप्त हो.

इस दृष्टि से मेरी बहुत इच्छा है कि धार्मिक नेता अस्पृश्यता – निवारण को धार्मिक मान्यता प्रदान करें. मेरा यह भी मत है कि मनुष्य का सच्चा धर्म यही है कि उसका जो भी कर्तव्य हो, उसे बिना ऊँच – नीच का विचार किए, उसकी श्रेष्ठतम योग्यता के साथ वहन करें. सभी कार्य पूजास्वरूप हैं और उन्हें पूजा की भावना से ही करना चाहिए.

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