पटना, 30 नवंबर। पटना के ज्ञान भवन में राष्ट्रीय समाज विज्ञान परिषद द्वारा 31वॉ वार्षिक संगोष्ठी का उदघाटन किया गया। यह संगोष्ठी पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय पटना के द्वारा आयोजित किया गया। संगोष्ठी का मुख्य विषय “समाजिक विज्ञान और राष्ट्रीय पुनरूत्थान” था। मौके पर प्रोफेसरों ने सामाजिक, आर्थिक और शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
संगोष्ठी में मुख्य अतिथि महामहिम राज्यपाल लालजी टंडन ने कहा कि ऐसा लग रहा है की हमारा देश में सामाजिक, आर्थिक और शिक्षा सभी पश्चिमी सभ्यताओं की देन है। भारतीय कुछ भी प्रतित नही होता है। इस पर काम कर हमें बदलना होगा। आज विद्यालय में पढाई नहींही बल्कि भेद-भाव की पढाई की जा रही है। जिससे देश में विविधता और तनाव उत्पन्न हो रही है।

मौके पर उपस्थित प्रोफेसर अनिरूध मिश्रा ने कहा कि प्रकृति और पर्यावरण की देखभाल करने से सामाज का उत्थान होगा। सामाज और पर्यावरण को एक सुत्र में बाधन सबसे जरुरी है।
वही दूसरी तरफ प्रो.पी.वी कृष्ण भट्ट ने कहा कि अंग्रेजीयत प्रभुत्व अपना परचम लहरा रहा है। हम अपनी भाषा की पहचान खोने लगे है, इसलिए हमें अपनी भाषा के महत्व को समझना होगा। पाठ्य पुस्तकों की पुनर्लेखन आज के समाज की मांग है।
इस मौके पर बिहार सरकार विधि एवम् शिक्षा मंत्री कृष्णनन्दन वर्मा और पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति गुलाबचंद राम जयसवाल और सुषमा यादव उपस्थित रहे। इस मौके पर राजीव कुमार द्वारा रचित क्रांतिदूत जयप्रकाश नरायण नामक पुस्तक का विमोचन भी किया गया।

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