बातचीत – अरुण ओझा , राष्ट्रीय संयोजक (स्वदेशी जागरण मंच), मुद्दा – स्वदेशी जागरण मंच
1. स्वेदेशी जागरण मंच का निर्माण किस उद्देश्य को ध्यान में रख कर किया गया था ?
उत्तर- स्वेदेशी जागरण मंच 22 नवंबर 1991 को बना. प्रधानमंत्री पी.वि. नरसिंहा राव के कार्यकाल में तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा संसद में जो बजट प्रस्तुत किया गया. बजट प्रस्तुत करने से पहले से देश में एक लहर पैदा की गयी थी कि विदेशी पूंजी और विदेशी निवेश के बिना देश का विकास नहीं हो सकता है.
बजट में काफी चीजों पर कस्टम ड्यूटी टैक्स को कम कर दिया गया. बाद में इस बजट का नाम दिया गया एल.पी.जी. यानि लिबरलाइजेशन, प्राइवेटाइजेशन, ग्लोबलाइजेशन. इस बजट के लागु होते ही विदेश कंपनीयों भारत में अपना व्यापार करना शुरू कर दिया. इससे स्वदेशी वस्तुएं , स्वदेशी रोजगार पर काफी प्रभाव पड़ा. अधिक संख्या में लोग बेरोजगार हो गए.
इसके इतर गेट के जरिये विश्व व्यपार की जो निति उरुग्वे में चल रही थी. जिसे उरुग्वे राउंड कहा गया. इनके वार्ताओं का दौर चल रहा था.
इन दो परिप्रेक्षों को ध्यान में रख कर राष्ट्रवादी लोगों ने इसे एक नए तरह की आर्थिक गुलामी का नाम दिया.इस आर्थिक आक्रमण से निपटने के लिए संगठन, संस्था इससे निपट नहीं सकती थी. इसके लिए एक राष्ट्रवादी मंच की जरुरत थी. इस सोच के साथ राष्ट्र स्तर का स्वदेशी जागरण मंच का निर्माण हुआ. देशहित, स्वदेशी वस्तुएं की सुरक्षा और स्वदेशी रोजगार के लिए कई अन्य विचारधारों के लोग इस राष्ट्रवादी मंच से जुड़े. उनकी सोच केवल आर्थिक राष्ट्रवाद या आर्थिक स्वतंत्रता है.
स्वेदेशी जागरण मंच आर्थिक आज़ादी की लड़ाई के लिए एक मंच बना.
2. वर्तमान में एफ.टी.आई व वालमार्ट जैसी चीजें अपने देश में आ चुकी है. इन सब से स्वदेशी जागरण मंच कैसे निपट रही है ?
उत्तर – स्वदेशी जागरण मंच हमेशा से मुद्दों को लेकर जन जागरण की लड़ाई लड़ रहा है. 91 के बाद देश के अर्थव्यवस्था में जो नई राह बनी , बाद में कम – अधिक मात्रा में वह राह चलते रही है. आर्थिक चिंतन, राजनीतिक लोग वो कोई भी पार्टी या कोई भी विचारधारा से हो किसी ने भी इस नीति का विरोध नहीं किया. न ही इसके खिलाफ में कोई नई नीति ला पायी. मनमोहन सिंह की सरकार में सी.पी.आई वालों ने भी इसका समर्थन किया.
अटल जी की सरकार में स्वदेशी जागरण मंच के अभियान के कारण बहुत सारी बातों पर रोक लगी. वर्तमान की सरकार में स्वदेशी की कई बातों को अपने नीति का निर्देशक तत्व माना है. जैसे चीन से आने वाले कई वस्तुओं पर रोक लगाना. चीन के बने हुए पटाखों को रोक लगाना. 100 से अधिक वस्तुओं पर डंपिंग ड्यूटी पर रोक लगी.
खुदरा व्यपार में पिछली सरकार ने 51 प्रतिशत की मान्यता दे दी थी. लेकिन इस सरकार ने रोका है.
3. 2017 में चीनी वस्तुओं के बहिष्कार का बड़ा लहर उठा था, जो 2018 में गायब होता हुआ दिखाई दिया. इसके मुख्य कारण क्या थे ?
उत्तर – 2017 में स्वदेशी जागरण मंच ने ये फैसला लिया था कि पुरे वर्ष राष्ट्रीय स्वदेशी सुरक्षा अभियान मनाया जाएगा. यह अभियान वर्ष था, जिसमें मुख्य रूप से चीन से आने वाली वस्तुओं का विरोध व बहिष्कार किया गया था. इस निर्णय के तहत पुरे साल अनेक तरह से चीनी वस्तुओं के प्रति जन जागरण किया गया. इस अभियान का समापन 30 नवंबर, 2017 को दिल्ली के रामलीला मैदान में किया गया. इस समापन में 101 संगठनों ने अपना समर्थन दिया. स्वदेशी के झंडे के नीचे देश के डेढ़ लाख कार्यकर्ताओं ने चीनी वस्तुओं का विरोध किया था.
2017 अभियान वर्ष था. कोई भी अभियान लगातार नहीं चलता है. समापन होने के बाद भी चीनी वस्तुओं के प्रति जन जागरण समय – समय पर किये जा रहे हैं.
4. स्वदेशी जागरण मंच की बिहार में क्या स्थिति है ?
उत्तर – बिहार में स्वदेशी जागरण मंच के दो प्रांत हैं, दक्षिण बिहार व उत्तर बिहार. बिहार के 38 जिलों में से 29 जिलों में हमारे संयोजक हैं . उन सभी जिलों में जिला समिति सुचारू रूप से कार्यवहन कर रही है. बाकी बचे जिलों में भी हमारे सम्पर्क हैं.
5. भविष्य में स्वदेशी जागरण मंच की क्या योजनायें हैं?
उत्तर – दो मुद्दों को लेकर स्वदेशी जागरण मंच कार्य कर रही है. आगे भी इन्ही दो मुद्दों को ध्यान में कार्य करना है.
पहला, आर्थिक स्वतंत्रता राष्ट्रवाद और दूसरा, स्वदेशी भाव का जन जागरण. इन दो मुद्दों के प्रचार – प्रसार के लिए अनेक प्रकार के संगोष्ठी, कार्यक्रम, व्याख्यानमाला का आयोजन अनेक जगहों पर करते हैं. कॉलेजों में, सेमिनारों में काफी जगहों पर कार्यक्रम होते रहते हैं.
देश में जैविक खेती के प्रति जन जागरण के लिए स्वदेशी जागरण मंच ने नारा दिया है ‘तब खादी, अब खाद’. इसके अलावा पर्यावरण के लिए भी स्वदेशी जागरण मंच कार्य कर रही है.

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