बिहार के भागलपुर में सजायाफ्ता कैदी निरक्षर कैदियों को साक्षर बना रहे हैं। यहां के शहीद जुब्बा सहनी केंद्रीय कारा और विशेष केंद्रीय कारा में बंद सजायाफ्ता कैदी एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं।
निरक्षर कैदियों को साक्षर बनाने के अभियान को जेल प्रशासन साक्षर कैदियों की मदद से आगे बढ़ा रहा है। इसके लिए शहीद जुब्बा सहनी केंद्रीय कारा में सात और विशेष केंद्रीय कारा में आठ शिक्षा केंद्र चलाए जा रहे हैं। यहां पठन-पाठन की सामग्री जेल प्रशासन उपलब्ध करा रखी है। उनके लिए वृहद पुस्तकालय की व्यवस्था की गई है। यहां कक्षा संबंधी पुस्तकों के अलावा साहित्यकारों, इतिहासकारों, महापुरुषों, आजादी के दीवाने रहे क्रांतिकारियों की जीवनी रखी गई हैं। कैदी सिर्फ अखबार का अवलोकन नहीं करते बल्कि पुस्तक पढऩे का भी समय निकालते हैं।
एक पुरानी कहावत है कि हर अपराधी का एक अच्छा भविष्य हो सकता है। यह समाज पर निर्भर करता है कि उसके कौशल को कैसे समाजोपयोगी बनाया जाए। इसी सोच के तहत खूंखार कैदियों का हृदय परिवर्तन कर शिक्षा का अलख जगाने की योजना राज्य सरकार ने बनाई। यह योजना भागलपुर में साकार होने लगी। पहले से निरक्षर इन कैदियों को जेल अधिकारियों और शिक्षा निदेशालय से भेजे प्रशिक्षकों को साक्षर बनाया। साक्षर बन इन कैदियों ने जेल में आने वाले सजायाफ्ता कैदियों के बड़े जत्थे को साक्षर बना डाला। ये कैदी अब छूट कर समाज में भी शिक्षा की अलख जगाएंगे।
यहां के कैदियों को अंडरवर्ल्ड की खौफनाक सच्चाई से भी डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से अवगत कराया जाता है। बुराइयों से अवगत कराने वाली डाक्यूमेंट्री दिखाकर उन्हें उस दुनिया से तौबा करने को जागरूक किया जाता है। ताश-लूडो छोड़ कक्षा के अलावा पुस्तकालय में बैठने की आदत लगाई गई। अब यहां कैदी रोज समय दे रहे हैं। कोई अखबार पढ़ता है तो कोई पुस्तक पढऩे में ध्यान लगाता है। इस अभियान में 50 से अधिक कैदी लगे हैं। यहां के कैदियों को दूरस्थ शिक्षा देने की भी व्यवस्था की गई है। समय-समय पर इग्नू से होने वाली परीक्षा में अधिकांश कैदी सफल हुए हैं।
जेल प्रशासन को पूर्ण विश्वास है कि अपनी सजा समाप्त कर जब ये समाज के मुख्यधारा में जाएंगे तो निश्चित तौर पर शिक्षा की अलख जगायेंगे।
—– संजीव कुमार

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