पटना, 06 अगस्त : “6 अगस्त 1999″ यह वही दिन था जब हमने पूर्वोत्तर में संघ के 4 वरिष्ठ कार्यकर्ता खोए थे. 6 अगस्त 1999 की सुबह उत्तरी त्रिपुरा के धोलाई जनपद के कंचनछेड़ा से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 4 वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का अपहरण कर लिया गया था और दो वर्षों के बाद उनकी निर्मम हत्या की खबर मिली थी.

पूर्वांचल के क्षेत्र कार्यवाह श्री श्यामल कांति सेनगुप्ता, दक्षिण असम प्रांत के प्रांत शारीरिक प्रमुख श्री दीनेन्द्र नाथ डे, अगरतला के विभाग प्रचारक श्री सुधामय दत्त और उत्तर त्रिपुरा के प्रचारक श्री शुभंकर चक्रवर्ती का उस समय अपहरण कर लिया गया था जब वे कंचनछेड़ा के वनवासी कल्याण आश्रम के छात्रावास में आयोजित बैठक में भाग लेने के लिए एकत्रित हुए थे.

11 अगस्त को अपहरण की जिम्मेदारी लेते हुए त्रिपुरा के अलगाववादी संगठन नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा ने मांग की थी कि त्रिपुरा सरकार त्रिपुरा स्टेट रायफल्स (टी.एस.आर.) को भंग कर दे, तभी इनकी रिहाई होगी. नेशनल लिबरेशन फ्रंट आफ त्रिपुरा के उग्रवादियों को जब लगा कि सरकार उनकी मांग नहीं मानेगी तब उन्होंने रा.स्व.संघ से फिरौती की मांग की, पर न तो संघ अपहरणकर्ताओं के सामने झुका और न ही कार्यकर्ताओं ने इसके लिए कहा, यह था “राष्ट्रभक्ति” का अनुपम उदाहरण.

28 जुलाई, 2001 को केन्द्र व राज्य सरकार ने अपने लिखित संदेश में कहा कि उग्रवादियों ने इन चारों कार्यकर्ताओं की लगभग 6 माह पूर्व ही हत्या कर दी थी. यह था उनका अमर बलिदान. लगभग डेढ़ वर्ष तक वे सर्दी, गर्मी, बरसात में जंगल-जंगल भटकते रहे होंगे पर राष्ट्रभक्ति उनमें इस कदर भरी हुई थी कि अपने जीवन की रक्षा के लिए राष्ट्र के धन की चाह न करते हुए मातृभूमि की बलिवेदी पर बलिदान दे दिया. आज के दिन हम इन महापुरुषों को श्रद्धांजली अर्पित करते हैं.

नरेन्द्र ठाकुर (आरएसएस- अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख, पटना)

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