बेगूसराय, 24 मई। किसी भी प्रकार की असमानता जो समाज को असंतुलित और आंदोलित करती है उसके ख़िलाफ़ संघ सिर्फ़ शब्दों व नारों से नही बल्कि कर्म से संघर्षरत हैं। उक्त बाते संघ विचारक राकेश सिन्हा ने बेगूसराय में हो रहे वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा किये जा रहे एक कार्य क्रम में कहा। उन्होंने कहा कि  कम्यूनिस्टो ने नरेवाजी कर समाज का नुकसान किया है और गैर बराबरी को अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए उपयोग किया है। संघ जमीन पर निशब्द क्रांति कर रहा है कार्यकर्त्ता अपने तन-मन-धन से समाज से अस्पृश्यता, सामंतवादी सोच और ग़ैर बराबरी मिटाने में कृतसंकल्प है। संघ का कार्य जनपक्षधरता को लेकर आगे बढ़ता है।

बंचित की पीड़ा जब हमें रात में सोने नही दे तभी इनके घर में उजाला होगा।


बेगूसराय बिहार की आत्मा है स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका अतुलनीय थी परंतु प्रकांतर में सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से यह अग्रणी क्यों नही हो पाया यह सामूहिक चिंतन का अवसर है। वनवासी कल्याण आश्रम और सामाजिक समरसता मंच का कार्य लोगों में नई ऊर्जा का संचार कर रही है।

संघ के कार्य ने 1934 में महात्मा गांधी को आकर्षित किया था और अस्पृश्यता के ख़िलाफ़ संघ का सफल प्रयोग देखकर वे चकित रह गये थे और प्रथम सर संघचालक पूजनीय हेडगेवार जी को इसका श्रेय भी दिया था।

इस अबसर पर प्रान्त प्रचारक रामकुमार ने संघ द्वारा समाज में किये जा रहे कामो की चर्चा की बिहार के समरसता प्रमुख अमरेंद्र सिंह उर्फ लल्लू बाबू ने बिगत 18 साल में वनवासी कल्याण आश्रम के काम की चर्चा की तथा उन्होंने बताया की वनवासी कल्याण आश्रम और संघ बंचित के बीच सदैब जमीन पर काम करता है और समरस समाज का निर्माण कैसे हो इसकी चिंता करता है।

वनवासी कल्याण आश्रम के जिलाध्यक्ष शंभू कुमार ने कहा कि वंचित के बीच पूर्ण विकास की रौशनी पहुँचाने हमारा लक्ष्य इस वर्ष रखा गया है। गया जिले से आये विधायक राजीब ने स्वर्गीय राजेंद्र सदा की तुलना दसरथ मांझी से की। उन्हो९ने कहा कि दोनों महापुरुष का व्यक्तित्व अपने-अपने स्थान पर श्रेष्ट है।

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