नाम- राही मासूम रज़ा, जन्म – 1 सितंबर, 1927 , जन्मस्थान – गाजीपुर, उत्तर प्रदेश।
राही मासूम रज़ा की प्रारंभिक शिक्षा गाजीपुर में होने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। जहाँ उनका उज्ज्वल भविष्य राह देख रहा था। अलीगढ़ यूनिवर्सिटी से ‘उर्दू साहित्य के भारतीय व्यक्तित्व’ पर पी-एच.डी किया और जीविकोपार्जन के लिए यही अध्यापन कार्य शुरू किया। अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में रहने के कारण उनके ऊपर साम्यवादी विचारों का प्रभाव नज़र आता है। कई वर्षों तक उर्दू-साहित्य पढ़ाने के बाद सन 1968 में फ़िल्म लेखन के लिए बंबई (आज का मुम्बई ) आ गए।
बम्बई में रहते हुए राही ने फ़िल्म-लेखन के अलावे गीतों की भी रचना की। इसी क्रम में उन्होंने हिंदी साहित्य में अपना योगदान दिया आधा गाँव, दिल एक सादा कागज़, ओस की बूंद ऐसे तमाम उपन्यास उनके काफी प्रसिद्ध हुए। सन 1965 के भारत चीन युद्ध के नायक रहे अब्दुल हमीद की जीवनी ‘छोटे आदमी की बड़ी कहानी’ राही मासूम रज़ा ने लिखी।
राही स्पष्टवादी व्यक्ति थे। धर्मनिरपेक्ष राष्ट्रीय दृष्टिकोण के कारण वह काफी लोकप्रिय हुए।
दूरदर्शन के लिए 100 से अधिक धारावाहिक लिखे
बंबई में रह कर उन्होंने 300 फ़िल्मो की पटकथा और संवाद लिखे तथा दूरदर्शन के लिए 100 से अधिक धारावाहिक लिखे, जिनमें ‘महाभारत’ और ‘नीम का पेड़’ सर्वाधिक लोकप्रिय हुआ। जिसे समाज का प्रत्येक वर्ग,, अपने परिवार के साथ बैठ कर देखा करते थे।
राही मासूम रज़ा का निधन 15 मार्च,1992 को बंबई में हुआ। राही जैसे लेख़क कभी भुलाए नहीं जा सकते। उनकी रचनाएं हमारी गंगा-जमुना संस्कृति की प्रतीक है जो वास्तविक हिंदुस्तान की परिचायक है।

अभिलाष दत्ता

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