श्रीराम मंदिर के बनने पर सबसे ज़्यादा ख़ुशी अयोध्या के सरायरासी गाँव के लोगों को हुई होगी। सन् 1528 में ठाकुर गजसिंह जी के नेतृत्व में जो लड़ाई बाबर के साथ लड़ी गई थी उस लड़ाई से पहले ठाकुर गजसिंह ने प्रतिज्ञा थी कि जब तक श्रीराम मंदिर नहीं बनेगा तब तक वो पैर में जूता और सिर पर पगड़ी नहीं पहनेगें और उनकी वो प्रतिज्ञा आज भी अयोध्या के सरायरासी गाँव में ज़िन्दा है जहां के लोग आज भी पैर में जूता और सिर पर पगड़ी और छाता लेकर नहीं चलते है। 500 वर्षों से भी ज़्यादा हो गए और अब ये श्रीराम मंदिर के हक़ में फ़ैसले की बात सुनकर कितना खुश हुए हैं उसका अंदाज़ा शायद ही कोई लगा पाये।

ठाकुर परिवार खुद को भगवान राम का वंशज मानते हैं…


सुप्रीम कोर्ट के राम मंदिर निर्माण के आदेश के बाद अयोध्या के इन गांवों में उत्साह है। सरायरासी के बासदेव सिंह ने कहा कि हमारे पूर्वजों का संकल्प पूरा हुआ है। इतने वर्षो तक सूर्यवंशी क्षत्रियों ने शादी में भी पगड़ी नहीं बांधी है। समारोहों व पंचायत में भी संकल्प के मुताबिक सिर खुला रखते रहे हैं। सूर्यवंशी क्षत्रिय अयोध्या के अलावा पड़ोसी बस्ती जिले के 105 गांव में रहते हैं।
अयोध्या के भारती कथा मंदिर की महंत ओमश्री भारती का कहना है कि ‘सूर्यवंशियों ने सिर न ढंकने का जो संकल्प लिया था, उसका पालन करते हुए शादी में अलग तरीके से मौरी सिर पर रखते रहे हैं, जिसमें सिर खुला रहता है। पूर्वजों ने जब जूते और चप्पल न पहनने का संकल्प लिया था तब चमड़े के बने होते थे। इस कारण पैर की सुरक्षा के लिए खड़ाऊ पहनने लगे। लेकिन चमड़े के जूते कभी नहीं पहने गए। सूर्यवंशी क्षत्रियों के परिवार कोर्ट के फैसले से खुश हैं और उन्हें भव्य मंदिर बनने का इंतजार है।

बिहार में भी एक व्यक्ति ने लिया है संकल्प, 18 साल से नहीं पहनी चप्‍पल


बिहार के किशनगंज में भी एक राम भक्त ने 18 साल से चप्पल नहीं पहना है। राम भक्त देवदास उर्फ देबू दा किशनगंज जिले के रोलबाग मोहल्ला के रहने वाले हैं। 38 वर्षीय देबू दा ने 18 साल पहले प्रतिज्ञा ली थी कि जब तक अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक वो नंगे पांव रहेंगे। अब राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ होने के बाद देबू दा अयोध्या जाकर चप्पल पहनेंगे।

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