बातचीत प्रभात वर्मा (मगही फिल्म – निर्माता निर्देशक)
मुद्दा- क्षेत्रीय सिनेमा और बिहार
1.विधना नाच नचावे फ़िल्म बनाने के पीछे आपकी क्या सोच थी?

उत्तर- बिहार में क्षेत्रीय भाषा की फ़िल्मो को बड़े खराब नज़रों से देखा जाता है। आज के बच्चे अपनी लोक भाषा के शब्दों को भी नहीं जानते हैं। मैं बिहार के मगध क्षेत्र से आता हूँ। इसलिए मगही भाषा के उत्थान के लिए इस फ़िल्म को बनाने का फैसला लिया। मगही भाषा मे फिल्में न के बराबर बनती है। अपने संस्कृति से लोगों का परिचय हो इसलिए एक पारिवारिक फ़िल्म बनाने का विचार मेरे दिमाग मे आया। विचार का परिणाम रहा ‘विधना नाच नचावे’।
2.यह फ़िल्म बनाने में आपको किस तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?

उत्तर- अपनी पूरी संपति इस फ़िल्म बनाने में लगा दिया। फ़िल्म निर्माण में राज्य सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिली। शूटिंग के दौरान भीड़ को संभालने के लिए प्रशासन ने कोई सुरक्षा भी मुहैया नहीं कराई। समाज के असामाजिक तत्व फ़िल्म में काम करने वाली महिला कलाकारों पर गलत टिप्पणी किया करते थे।
3.फ़िल्म निर्माण के बाद आपको किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है?

उत्तर- बिहार सरकार और यहाँ की जनता क्षेत्रीय फ़िल्मो के प्रति उदासीन नज़र आती है। 5 अक्टूबर, 2018 को यह फ़िल्म सिनेमाघरों में लगना तय हुआ था। लेकिन यहाँ के सिनेमाघरों ने इसे शो देने से मना कर दिया। महाराष्ट्र और बाकी राज्यों में क्षेत्रीय फ़िल्मो के लिए हर सिनेमाघरों में दो शो आरक्षित रहती है। लेकिन ऐसा कोई नियम बिहार में नहीं है। इसका फायदा सिनेमाघरों के मालिक उठाते हैं। बहुत से सिनेमाघर के मालिक ने अपने हॉल में फ़िल्म प्रदर्शन के लिए पैसों की माँग की। सरकार का ध्यान इस ओर जाए इसके लिए हमने धरना भी दिया। हमारी माँग है क्षेत्रीय फ़िल्मो को सरकार टैक्स फ्री करे और हर सिनेमाघरों में कम-से-कम दो शो आरक्षित करे।
4.भविष्य में आपकी आगे क्या योजना है?

उत्तर- अगर यहाँ की सरकार और जनता का समर्थन मिला तो भविष्य में एक मगही फ़िल्म ‘सौतेली’ का निर्माण जरूर करना चाहूंगा।

अभिलाष दत्ता

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