बिहार फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट एंड मीडिया रिपब्लिक भारत के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी के ऊपर पुलिस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करती है। जिस प्रकार अर्णब को पुलिस हिरासत में लिया गया वह आपातकाल की याद दिलाता है। महाराष्ट्र में पत्रकारों के ऊपर लगातार हमले हो रहे हैं। महाराष्ट्र की सरकार अपनी नाकामी को छिपाने के लिए पत्रकारों के ऊपर सुनियोजित आक्रमण कर रही है। बिहार के पत्रकार संगठनों का फेडरेशन महाराष्ट्र सरकार के अलोकतांत्रिक तथा अमर्यादित व्यवहार की भर्त्सना करता हैं। अभिव्यक्ति की आजादी पर हमले कतई बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।

महाराष्ट्र सरकार अविलंब अर्णव को बाइज्जत बरी करें और अपने कुकृत्य के लिए पत्रकार समुदाय से माफी मांगे।
जेपी ने उस आपातकाल के विरुद्ध संघर्ष किया था, जिसमें प्रेस की आजादी छीनी गई थी और पत्रकारों को जेल में डाला गया था।
बिहार के पत्रकारों ने 1980 के दशक में जगन्नाथ मिश्र के प्रेस बिल के खिलाफ लड़ाई लड़ी और जीती थी। महाराष्ट्र में प्रेस की आजादी पर हमला हुआ है। आज नई पीढ़ी देख सकती कि आपातकाल में मीडिया का दमन कैसे हुआ था।

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