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पटना/दरभंगा  (विसंके)। दरभंगा स्टेशन पर 17 जून को हुए पार्सल ब्लास्ट की जांच में चैंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस बिस्फोट में उच्च तीव्रता के केमिकल बम का इस्तेमाल किया गया था। कपड़े की गाठ में होने और पार्सल स्टेशन पर उतर जाने के कारण ब्लास्ट से कोई बहुत बड़ा नुकसान नहीं हुआ। फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ।
एफएसएल की जो रिपोर्ट बिहार एटीएस को सौंपी गई है, उसमें कई बातें बताई गई है। ब्लास्ट में केमिकल के इस्तेमाल किये जाने की बात भी इस रिपोर्ट में कही गई है। यह भी जानकारी दी गई है कि इसमें हाईडेन सिटी केमिकल बम था। इस बम को कपड़े के बंडल में रखा गया था। कपड़े की गांठ में होने के कारण इस केमिकल से बड़ा धमाका नहीं हुआ। कपड़े की इस गांठ का पार्सल तेलंगाना के सिकंदराबाद स्टेशन से बुक किया गया था। इस पार्सल को दरभंगा का मोहम्मद सुफियान रिसीव करने वाला था। हैरतअंगेज बात यह है कि इस मोहम्मद सुफियान का कुछ अता-पता नहीं है। इस ब्लास्ट को लेकर राज्य और केन्द्र सरकार सक्रिय है। बिहार के अलावा तेलंगाना और उत्तर प्रदेश के पुलिस दल भी इस मामले की विशेष निगरानी कर रहे हैं।

संयुक्त रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई


इस मामले को लेकर बिहार, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना पुलिस जांच में जुटी हुई है। तीनों राज्यों की एटीएस एक साथ इस मामले की जांच कर रहे हैं। 24 जून को उत्तर प्रदेश एटीएस की टीम भी पटना पहुंच गई जो बिहार एटीएस अधिकारियों के साथ मिलकर जांच में जुट गई है। गुरुवार को पटना में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। इसमें बिहार रेल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एटीएस के अधिकारी, एफएसएल के वरीय अधिकारी और उत्तर प्रदेश से आये एटीएस की टीम भी शामिल थी। इनके साथ आभाषी (वर्चुअल) तरीके से तेलंगाना एटीएस की टीम भी जुटी। इस बैठक के बाद तीनों राज्यों की एटीएस ने एक संयुक्त रिपोर्ट तैयार की। यह रिपोर्ट अब तक के हुए जांच और उसके आधार पर मिले सबूतों के आधार पर तैयार किया गया है। ऐसा माना जा रहा है कि आगे की कार्रवाई एनआईए करेगी।

देश के कई राज्यों में ऐसे विस्फोट हुए हैं


दरभंगा रेलवे स्टेशन पर हुए ब्लास्ट में जिन रसायनों का उपयोग किया गया था, वह बड़े पैमाने पर क्षति पहुंचाते हैं। इस तरह के केमिकल का उपयोग इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आइइडी) बम बनाने में किया जाता है। बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने के लिए आतंकी आइइडी बम में ऐसे केमिकल का उपयोग करते हैं। इन बमों के ब्लास्ट होने पर आग की लपटें बड़े पैमाने पर फैलती है। ऐसे बम का इस्तेमाल प्रेशर सेनसिटिव बार्स सिस्टम, या ट्रिप वायर सहित इंफ्रारेड मैग्नेटिक ट्रिगर्स अथवा रिमोट कंट्रोल से किया जाता है। भारत में आतंकियों ने कई स्थानों पर इस सिस्टम का उपयोग किया है। 2011 में जम्मू कश्मीर, 2013 में हैदराबाद, 2016 में पठानकोट धमाका जैसे कई उदाहरण हैं।

DARBHANGA PARSAL BAM BLAST

सावधानी से भेजा गया था केमिकल


दरभंगा रेलवे स्टेशन पर 17 जून को हुए धमाके ने एक बड़े आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया था। वास्तव में रेलवे स्टेशन पर पार्सल आया था। मोहम्मद सुफियान को दिया जाने वाला पार्सल को अलग कर जैसे ही कुली ने फर्स पर पटका, तेज धमाके के साथ गठ्ठर में आग पकड़ लिया। आतंकियों ने काफी सावधानी से इसे भेजा था। केमिकल के बोतल में दबाव नहीं पड़े इसलिए उसे कपड़े की गांठ की बीच में छिपाया गया था। अगर इस केमिकल के साथ कोई और विस्फोटक पदार्थ होता तो कोई बड़ी घटना भी हो सकती थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मिथिला प्रक्षेत्र के आईजी अजिताभ कुमार ब्लास्ट की जांच करने स्वयं पहुंचे थे। आईजी का भी मानना था कि दरभंगा पहले भी आतंकवादियों का गढ़ रह चुका है। दरभंगा माॅड्यूल आतंक की दुनिया में एक जाना-पहचाना नाम है। स्टेशन पर हुआ विस्फोट भले ही छोटा था। लेकिन, इसके पीछे कई गंभीर राज छुपे हुए थे। धमाके के कारण पार्सल के अंदर रखा कपड़ा जल गया और उसके अंदर से छोटा बोतल भी बरामद हुआ था। हालांकि अभी तक बोतल का ढक्कन नहीं मिला है।

सीसीटीवी फुटेज में दिखा था एक युवक


यह धमाका जीआरपी थाना के सामने एक्सलेटर के समीप प्लेटफाॅर्म संख्या-1 पर दोपहर करीब 3.25 बजे हुआ था। धमाके की आवाज सुनकर जीआरपी और आरपीएफ के इंस्पेक्टर वहां आनन-फानन में पहुंचे थे। किसी तरह आग बुझायी गयी थी। इस धमाके के बाद सीसीटीवी फुटेज को खंगाला गया। फुटेज में लगभग 35 साल का एक युवक कपड़े की गठरी के आस-पास मंडराता दिख रहा था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार का आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) जांच में जुटा। यह पार्सल सिकंदराबाद से आया था। इसलिए बिहार एटीएस ने तेलंगाना एटीएस की मदद ली। बिहार पुलिस की एक टीम सिकंदराबाद भी गई। टीम ने उस पते की तलाश भी की जहां से दरभंगा के लिए पार्सल बुकिंग हुई थी। लेकिन, मोहम्मद सुफियान का कोई अता-पता नहीं चला।

यूपी के शामली में बाप-बेटा हाजी कासिम और कफील हुआ गिरफ्तार


दरभंगा पार्सल ब्लास्ट केस की जांच एनआईए करेगी। गृह मंत्रालय से हरी झंडी के बाद एनआईए ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। आज एनआईए की टीम के बिहार आने की सूचना है। इसके बाद वह दरभंगा जाएगी। ब्लास्ट से जुड़े तीन संदिग्धों को तेलंगाना और उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया। यूपी के शामली में बाप-बेटा हाजी कासिम और कफील को हिरासत में लिया गया है। बताया जाता कि इनमें से ही किसी एक की आईडी पर वो सिम लिया गया था, जिसका नंबर पार्सल पर लिखा हुआ था।

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