पटना (नई दिल्ली), 06 सितम्बर। पिछले दिनों दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में “know your Urban Naxal” कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में नक्सलियों के शहरी नेटवर्क के बारे में बताया गया। कुछ दिन पहले महाराष्ट्र पुलिस के द्वारा 5 लोगो को गिरफ्तार किया गया था ” अर्बन नक्सल” शब्द उस गिरफ्तारी के बाद चर्चा में आया था। कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ए. के भागी, प्रसिद्ध स्तम्भकार अभिनव प्रकाश, सुप्रीम कोर्ट की वकील सुमन लता और नक्सल पीड़ित पोडियाम पांडा और फारुख अली के साथ अन्य विद्वान उपस्थित थे। ज्ञान्तव्य हो कि पोडियाम पांडा ने आत्मसमर्पण किया था और बहुत से चौकाने वाले खुलासे किए थे। पांडा ने खुलासा किया था कि दिल्ली के कुछ प्रोफेसर और मानवाधिकार कार्यकर्ता नक्सलियों से लगातार संपर्क में रहते हैं। फारुख अली और उनके भाई पर नक्सलियों ने कई बार हमला किया लेकिन वो लगातार नक्सलियों के विरोध में आवाज़ उठा रहे हैं। पोडियाम पांडा ने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के सभागार में अपना दुख बताते हुए कहा कि मैं पहले सरपंच था अपने गाँव का लेकिन नक्सलियों ने मुझे डरा धमका के अपने साथ जोड़ लिया। फारुख अली के भाई नक्सली विरोधी आंदोलन सलवा जुडूम से जुड़े थे इसलिए उनपर जानलेवा हमला हुआ था वो छत्तीसगढ़ की घटनाओं के बारे में बताते हुए भावुक हो गए। फारूक अली ने कहा कि जिस दिन नक्सलियों का शहरी कनेक्शन टूट जाएगा नक्सलियों का खत्म हो जाएगा। करोड़ो के उगाही की बातों को भी फारूक अली ने उजागर किया उन्होंने आगे कहा कि नक्सलि जो कहतें है कि वो आदिवासियों के हक़ के लिए लड़ रहे है असल मे ऐसा नहीं है आदिवासियों के विकास में सबसे बड़ी रुकावट है।

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