पटना, 11 नवंबर। हिंदी साहित्य के ज्ञाता आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव का आज प्रातः सवा पाँच बजे निधन हो गया। उन्होंने अपने संदलपुर, बाज़ार समिति, पटना स्थित आवास पर अंतिम श्वांस का परित्याग किया। वे 94 वर्ष के थे। मालूम हो कि आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव काफी दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। पिछले दिनों ही महामहिम राज्यपाल लालजी टंडन ने एक कार्यक्रम के दौरान अस्पातल जाकर उन्होंने सम्मानित किया था।
बिहार राष्ट्र भाषा परिषद् को नई ऊँचाई देने वाले आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव ने शोध-त्रेमासिकी परिषद्-पत्रिका का संपादन करते हुए चोटी के समीक्षक के रूप में अपनी पहचान बनाई थी। हिंदी-जगत के साहित्यकार आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव जी सात दशक तक साहित्य-साधना में लीन रहे।
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व साहित्य अकादमी, भारत सरकार के सदस्य अरूण कुमार भगत ने दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कृत, हिन्दी, प्राकृत, पाली, अपभ्रंश आदि अनेक भारतीय भाषाओं के विश्रुत विद्वान, साहित्यकार तथा बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के आदरणीय प्रधानमंत्री आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव ने अपना पार्थिव देह का त्याग कर इस दुनिया से विदा हो गए। उन्होंने कहा कि श्रीरंजन सूरिदेव जी मृदुल-मनोहर-मानस के लेखक व कवि रहे। आचार्य श्रीरंजन को साहित्यरत्न, सहित्यलंकार और व्याकरणतीर्थ की उपाधियों से भी नवाजा जा चुका है। विलक्षण प्रतिभा के धनी श्री सूरिदेव जी ने वर्तमान शताब्दी के पांचवें दशक में ही आचार्य शिवपूजन सहाय और आचार्य नलिन विलोचन शर्मा जैसे मूर्धन्य मनीषियों की दृष्टि में अपना स्थान युवा कवि के रूप मे बना लिया।

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