का जो प्रस्ताव लोकसभा में और राज्यसभा में रखा गया और वो बहुमत से पारित हुआ. इस पहल के लिए, इस साहसिक कदम के लिए, हम केंद्र सरकार का और विशेषतः प्रधानमंत्री और गृहमंत्री जी का बहुत हृदय से अभिनंदन करते हैं, उनको धन्यवाद देते हैं.
जब देश का विभाजन हुआ, उस समय धार्मिक आधार पर ही देश के विभाजन की मांग थी. जबकि भारत की मानसिकता में इस प्रकार की धार्मिक राज्य की कल्पना नहीं है. लेकिन इसी मुद्दे पर देश का विभाजन हुआ. उस समय के नेतृत्व ने इसको स्वीकार किया. अगर धर्म के आधार पर ये विभाजन न होता तो उसके बाद घटी हुई कई प्रकार की घटनाएं शायद नहीं होतीं. परन्तु जब ये विभाजन हुआ तो उसके बाद पाकिस्तान ने, बंग्लादेश ने, अपने आप को एक इस्लामिक स्टेट के रूप में घोषित किया और उसी समय ये आशंकाएं निर्माण हुईं कि वहां पर रहने वाले अल्पसंख्यक समाज का स्थान क्या रहेगा? परन्तु उस समय दो सरकारों के बीच जो एक समझौता हुआ था, उसमें ये बात कही गई कि इस्लामिक स्टेट होने के बाद भी किसी भी अल्पसंख्यक समुदाय के साथ कोई भेदभाव व अन्याय नहीं हुआ है .

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