भारत की आजादी के साथ जो दुर्भाग्य अपने से जुड़ा हुआ था, 72 वर्षों बाद अब धीरे-धीरे दूर हो रहा है। यह दुख की बात है की भारतवर्ष के हितों को ध्यान में रखकर केंद्र सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णय का भी कुछ लोग अपने स्वार्थों के लिए कर रहे हैं।
उक्त बातें सीमा जागरण मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक सी. मुरलीधर ने चित्ति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में रविवार को कहीं।
पटना के भारतीय नृत्य कला मंदिर में आयोजित नागरिकता संशोधन कानून विषयक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एनआरसी और सीएए पर विरोध अनायास नहीं है बल्कि एक साजिश के तहत और स्वार्थों की पूर्ति के लिए देश को अस्थिर करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है।
प्रज्ञा प्रवाह के क्षेत्र संयोजक रामाशीष सिंह ने नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के संदर्भ ने कहा कि विरोध करने वालों की पृष्ठभूमि को देखें साथ ही यह भी देखें किया उपद्रव और हिंसा सिर्फ भाजपा शासित राज्यों में क्यों हो रही है? छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भी बड़ी संख्या में मुसलमान है लेकिन वहाँ इस तरह की कोई हिंसा नहीं हो रही है। इस हिंसा को कांग्रेस के अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा दो-दो हाथ कर लेने के बयान के संदर्भ में देखने की बात भी उन्होंने कही। इससे तस्वीर स्पष्ट हो जाती है कि इस हिंसा का खुला समर्थन देने वाले कौन लोग हैं?
उन्होंने कहा कि 1947 में अपने पद और मनमानी के कारण मजहब के आधार पर देश को बांट देने वाले कांग्रेस और पंडित नेहरू की गलत नीतियों के कारण लाखों हिंदू मारे गए।
यह भी गौर करने वाली बात है अंग्रेजो के खिलाफ चलने वाली कई दशकों की लड़ाई में बंटवारे का कहीं जिक्र नहीं था लेकिन आजादी से मात्र 4 वर्ष पूर्व इसकी योजना बनी, 3 महीने पहले प्रस्ताव आए और एक झटके में देश के दो टुकड़े कर दिए गए।
उन्होंने कहा कि हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा भारतीय मुसलमानों को लेकर दिए गए बयान को पढ़ना चाहिए इससे वहां के लोगों को जो एनआरसी और सीएए का विरोध कर रहे हैं उनकी आंखें खुल जाएंगी। इमरान खान ने कहा है कि कि एक भी भारतीय मुसलमान को पाकिस्तान में दाखिल नहीं होने देंगे और आश्चर्य की बात है कि हमारे यहां के लोग रोहिंग्या मुसलमानों को बसाने के लिए छाती पीट रहे हैं कुत्सित प्रयास कर रहे हैं।

इससे पूर्व चित्ति के प्रांत संयोजक कृष्ण कांत ओझा ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि एक ऐसे समय में जब भारत सरकार के देश हित में लिए गए निर्णय का निजी स्वार्थों के लिए विरोध किया जा रहा है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हवाला देकर सरकारी संपत्तियों को नुकसान किया जा रहा है, पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला किया जा रहा है, ऐसे समय में नागरिक संशोधन कानून पर एक उचित दिशा में विमर्श हो इस हेतु इस कार्यक्रम का आयोजन जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत का मानस यह बात बखूबी समझ रहा है कि सी ए ए को लेकर किया गया विरोध भारत विरोधी मानसिकता का भौंडा प्रकटीकरण है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात इस्लामिक विद्वान मौलाना तुफैल अहमद कादरी ने की। मंच पर दलित महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बबन रावत, बहुचर्चित साहित्यकार डॉ शत्रुघ्न प्रसाद,सरदार मनप्रीत सिंह, मौलाना समीम रिजवी और अल्तमस बिहारी भी उपस्थित थे। स्वागत भाषण पटना विश्वविद्यालय के प्राध्यापक प्रो लक्ष्मी नारायण सिंह तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो समीर कुमार सिंह ने किया। मंच संचालन राजनैतिक विश्लेषक और पटना विश्वविद्यालय की प्राध्यापक *प्रो दीप्ति कुमारी ने किया।

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