नई दिल्ली. आईसीएचआर (ICHR) की तीन सदस्यों की समिति ने मालाबार में हुए मोपला के कथित विद्रोह में शामिल लोगों के नाम भारत के स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानियों की सूची में से हटाने की सिफारिश की. डिक्शनरी ऑफ मार्टियर्स: इंडियाज़ फ्रीडम स्ट्रगल 1857-1947 पुस्तक वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जारी की थी.
समिति ने बताया कि यह पूरा विद्रोह एक “खिलाफत” स्थापित करने का प्रयास था और इसने दंगाइयों के रूप में हाजी की भूमिका को उजागर किया. जिसमें एक शरिया अदालत की स्थापना की थी और बड़ी संख्या में हिन्दुओं का सिर कलम किया था.
इस तथाकथित विद्रोह में लगभग 6 महीने तक हिन्दुओं का नरसंहार हुआ था, जिसमें 10,000 से भी अधिक लोगों की मौत हुई थी.
शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले आईसीएचआर ने पुस्तक के पांचवें हिस्से में प्रविष्टियों की समीक्षा की और यह निष्कर्ष निकाला कि मालाबार विद्रोह में शामिल 387 लोगों के नाम पुस्तक से हटाने चाहिएं क्योंकि इन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की आड़ में हिन्दुओं का नरसंहार किया था.
आईसीएचआर की समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया कि “मोपला में लगभग सभी आक्रोश सांप्रदायिक थे और हिन्दू समाज के खिलाफ थे. यह सब कुछ असहिष्णुता के चलते किया गया था. इसीलिए जल्द ही निम्नलिखित नाम प्रकाशित होने वाले प्रोजेक्ट से हटाए जाने चाहिए.”
खिलाफत आंदोलन की आग में क्षेत्र के मुस्लिमों ने हिन्दुओं का बहिष्कार शुरू कर दिया और हिन्दुओं को निशाना बनाया गया. हिन्दुओं के घर, संपत्तियों और खेतों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया गया. जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया, लेकिन हिन्दुओं को बचाने कोई नहीं आया.
सौम्येन्द्रनाथ जैसे कम्युनिस्ट नेताओं ने इसे “जमीदारों के खिलाफ विद्रोह” बताया. जबकि इतिहासकार स्टेफन फ्रेडरिक डेल ने स्पष्ट लिखा कि – यह जिहाद था. वरियामकुननाथ कुंजाहमद हाजी के बारे में बताते हुए जे. नंदकुमार कहते रहैं कि हाजी एक ऐसे परिवार से आता था जो हिन्दू प्रतिमाएं ध्वस्त करने का आदि था. उसके अब्बा ने भी कई दंगे किए.
जिसके बाद उसे मक्का में प्रत्यर्पित कर दिया गया था. मोपला दंगे के दौरान कई हिन्दू महिलाओं के साथ दुष्कर्म भी किया गया और मंदिरों को ध्वस्त भी किया गया.
बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने पाकिस्तान अथवा भारत का विभाजन पुस्तक में लिखा है कि मोपला दंगा दो मुस्लिम संगठनों ने किया था.
बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने इसे हिन्दू मुस्लिम दंगा मानने से इनकार करते हुए कहा था कि हिन्दुओं की मौत का कोई आंकड़ा नहीं है, लेकिन यह संख्या बहुत बड़ी है.
यदि हम वामपंथी और कांग्रेसी विचारकों की बात देखें तो वह लगातार मोपला के इन हिन्दू विरोधी दंगों को स्वतंत्रता आंदोलन के नाम से परोसते आए हैं और हमें यह बताया जाता रहा कि यह सभी जिहादी स्वतंत्रता सेनानी थे.

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