कोरोना में शहीद पत्रकारों के प्रति सरकार उदासीन, अनुवाद पर निर्भर रहना, भाषायी पत्रकारिता के साथ अन्याय, पत्रकारों को महाभारत के संजय से निष्पक्षता की प्रेरणा लेनी चाहिए…


पटना (विसंके)। मीडिया का पेशा पहले व्रत था, अब वृति हो गया है। लेकिन, हमें समझना होगा कि न तो पत्रकारिता कोई उत्पाद है और न ही पाठक कोई ग्राहक है। उक्त बातें वरिष्ठ पत्रकार और आईएफडब्ल्यूजे के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. विक्रम राव ने रविवार को कहीं। वे विश्व संवाद केंद्र द्वारा आयोजित देवर्षि नारद स्मृति कार्यक्रम सह पत्रकार सम्मान समारोह में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। विषय था— पत्रकारिता का धर्म।

के. विक्रम राव 70 के दशक में देश में लगाए गए आपातकाल की चर्चा करते हुए कहा कि उस समय पत्रकारिता और पत्रकारों के लिए कष्ट का महौल था। सात प्रांतों की पुलिस उन्हें ढूंढती थी।

उन्होंने कहा कि चीन प्रदत कीटाणु से लड़ते हुए कई पत्रकार शहीद हो गए। दु:ख की बात है सरकारों ने उन पत्रकारों के लिए कुछ विशेष नहीं किया। सरकार की ओर से ऐसी उदासीनता से तकलीफ होती है। उत्तर प्रदेश जैसे कुछ प्रांत इसमें अपवाद हैं।

राव ने कहा कि चीन में सड़क का नाम ‘तिब्बत मार्ग’ रखा गया। हमें भी चाहिए कि शांति मार्ग का नाम बदलकर ‘दलाई लामा मार्ग’ रखा जाए। कब्जा करने वालों को सच्चाई का पता चलेगा। उन्होंने कहा कि भाषायी पत्रकारिता विशेषकर हिंदी पत्रकारिता के लिए विकृति है कि हम अनुवाद के भरोसे हैं। अनुवाद एक प्रकार का जूठन है। अनुवाद पर निर्भर रहना, भाषायी पत्रकारिता के साथ अन्याय है।

अपने जीवन से जुड़ी घटनाओं के माध्यम से उन्होंने खबर को प्रकाशित करने या न करने, पत्रकार का धर्म, निष्पक्षता आदि के प्रसंग साझा किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को महाभारत के संजय से निष्पक्षता की प्रेरणा लेनी चाहिए। नारद को उन्होंने घूमंतु संवाददाता के रूप में उद्धृत करते हुए कहा कि कुछ लोग उन्हें झगड़ा लगाने वाला कहते हैं। लेकिन, सच यह है कि वे न्याय के पक्ष में रहने वाले योद्धा थे। खबर घर्षण से ही निकलती है, यह बात हमें सर्वप्रथम नारद जी ने ही सिखायी।

इससे पूर्व विषय प्रवेश कराते हुए वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने पत्रकारिता के बदलते दौर और पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का मूल धर्म है सही सूचना देना। लेकिन, आज सही सूचना देने वाले पत्रकारों की हत्याएं हो रही हैं। यह हत्या विभिन्न क्षेत्रों के माफियाओं द्वारा कराई जा रही हैं। दु:ख की बात है कि किसी भी सरकार का ध्यान पत्रकारों की सुरक्षा की ओर नहीं है। भय के माहौल में मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता कर पाना कठिन है।

विश्व संवाद केंद्र के सचिव डॉ. संजीव चौरसिया ने संस्था के बारे में बताया​ कि विगत डेढ़ दशक से पत्रकारिता के सार्थक विमर्श तैयार करने और राष्ट्रीय हितों को रेखांकित करने वाले मुद्दों को सामने लाने में विश्व संवाद केंद्र सक्रिय है। हर वर्ष में बिहार में उल्लेखनीय रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को संस्था द्वारा सम्मानित किया जाता है। संस्था के इस प्रयास से निष्पक्ष व सच्ची पत्रकारिता को बल मिलता है। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष श्रीप्रकाश नारायण सिंह ने कहा कि नागरिक पत्रकारिता को बढ़ावा देने के ध्येय से संस्था द्वारा 2006 से ही पत्रकारिता प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जाता है। इसके सकारात्मक परिणाम निकले हैं कि आज की तारीख में संस्था द्वारा प्रशिक्षित पत्रकार देश के अधिकतर छोटे—बड़े मीडिया संस्थानों में अपनी सेवा दे रहे हैं।

पत्रकार सम्मान समारोह में इस वर्ष वरिष्ठ पत्रकार परशुराम शर्मा को ‘देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद पत्रकारिता शिखर सम्मान—2022’ से विभूषित किया गया। वहीं, रोहतास जिले के ब्रजेश कुमार पाठक को बहुचर्चित पुल चोरी कांड की रिपोर्टिंग के लिए ‘केशवराम भट्ट पत्रकारिता सम्मान—2022’ दिया गया। पटना में फैल रहे ड्रग्स कारोबार का सच दिखाने के लिए टीवी पत्रकार अजय कुमार दुबे को ‘बाबूराव पटेल रचनाधर्मिता सम्मान—2022’ से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के आरंभ में कोरोनाकाल में अपनी जान गवां चुके बिहार के पत्रकारों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। मंच संचालन विश्व संवाद केंद्र के संपादक संजीव कुमार ने किया।

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