सुबोध कुमार साह
बिहार,11नवम्बर। उत्तर भारत में लगातार चार दिनों तक चलने वाले लोकआस्था का महापर्व छठ आज से प्रारंभ हो गई है। आज नहाय खाय यानि ‘कद्दू भात’ के नाम से प्रचलित महापर्व की शुभारंभ हुई। पवित्रता व स्वच्छता के प्रतीक इस महापर्व में छठ गीत बजने से माहौल भक्तिमय हो गया है।
महापर्व छठ का आगाज रविवार को करते हुए महिलाएं छठ के प्रमुख पकवान ठेकूआ प्रसाद के लिए गेहूँ धोकर सुखाती दिखी।
लोक आस्था के पर्व छठ में पहले दिन को नहाय खाय यानि ‘कद्दू भात’ के दिन रविवार को सुविधा के अनुसार छठ व्रत करने वाली महिला-पुरूष गंगा स्नान या अन्य जल श्रोतो से सुबह में ‘कद्दू भात’ बिना लहसून प्याज व सेंधा नमक से बनाते है। जिसमें अरवा चावल, चनादाल एवं कद्दू की सब्जी बनते है। फिर सूर्य देव को भोग लगाकर व्रती पान करते है।
सोमबार को दुसरे दिन खरना की पवित्रता सराहनीय है। तीसरे दिन मंगलवार को छठ व्रती नदी किनारे पुरे विधि विधान के साथ संध्या में अस्ताचल सूर्य को अर्रघ्य और चौथे दिन बुधवार को सुबह उगते सूरज को अर्रघ्य देने के पाश्चात्य व्रत रखने वाले महिलाएं व पुरूष उपवास भंग यानि पारण करते हुए व्रत का समापन करते हैं। इस लोक आस्था के महापर्व छठ को सूर्य व्रत भी कहा जाता है। इस अवसर पर व्रती महिलाएं व पुरूष चार दिनों के पुरे विधि विधान में स्वच्छता का विशेष महत्व देते हैं। घर से लेकर घाटों तक की साफ-सफाई का ख्याल रखना पड़ता है। यह लोक आस्था का महापर्व छठ में पुरोहित द्वारा पूजा नहीं होता है व्रती स्वयं ही सभी नियमों व अनुष्ठान को करते है।

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