बांका/पटना (विसंके)। बांका नगर थाना क्षेत्र के रेनिया जोगडीहा पंचायत के नवटोलिया के एक मदरसा में भयंकर विस्फोट होने से एक मौलवी की मौत हो गई। वहीं छः से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। बम विस्फोट इतना जबरदस्त था कि नूरी इस्लाम मस्जिद परिसर में स्थित मदरसा का भवन जमींदोज हो गया। विस्फोट की घटना के बाद पुलिस के पहुंचने से पहले ही गांव के सभी पुरुष फरार हो चुके थे। महिलाएं ही सामने आकर विस्फोट होने की बात कह रही हैं। विस्फोट में छः से अधिक लोगों के घायल होने और किसी अज्ञात जगह पर इलाज कराने की बात भी सामने आ रही है। ग्रामीणों की मानें तो सुबह 8 बजे के आसपास जोर का धमाका होने के बाद पूरा क्षेत्र धुएं से भर गया था। घटना के बाद से गांव व आस-पास के क्षेत्रों में दहशत का माहौल है।

बम फटने की हुई पुष्टि


मामले की जांच के लिए डॉग स्वॉड को बुलाया गया है और भागलपुर से फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम को भी बुलाया गया है। फॉरेंसिक टीम के सहायक निदेशक सर्वेशत्तम कुमार अपनी टीम के साथ घटना स्थल पर पहुंचे और बम फटने की पुष्टि की।

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मौलाना के लाश को आल्टो कार से फेंक कर फरार हुआ अपराधी


मृतक मौलाना के भाई मो. इकबाल को पूछने पर उसने बताया कि मुझे खबर मिली है कि आपका भाई घायल हो गया है और उसका इलाज चल रहा है। इकबाल ने कहा मेरा भाई पिछले 10 वर्षों से मस्जिद में नमाज अदा करता था और मदरसा में बच्चों को पढ़ता था। इकबाल ने कहा कि मेरे मृतक भाई के लाश को कुछ लोग अल्टो कार से फेंककर फरार हो गए।

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पुलिस कर रही है जाँच


पुलिस घायलों के जांच पड़ताल करने के लिए खोजबीन जारी है। फिलहाल बांका के एसडीपीओ डीसी श्रीवास्तव, बांका के थानाध्यक्ष शंभु यादव सहित भारी संख्या में पुलिस बल घटना स्थल पर मौजूद है। घटना के बाद बांका के एसपी अरबिंद कुमार गुप्ता ने भी घटनास्थल की जांच की।

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मस्जिद और मदरसा पर क्यूँ उठ रहे है सवाल


मस्जिद और मदरसा शुरू से ही विवाद में रहा है। काफिरों से नफरत कराने और दंगा भड़काने को लेकर अक्सर ये चर्चा में रहते हैं। जेहादियों द्वारा इसका उपयोग हिंसक प्रवृत्ति को बढ़ावा देने और मुसलमानों को छोड़कर अन्य सभी धर्मों से हिंसा करने के लिए प्रेरित कारनेमें भी रहता है। हिंसा फ़ैलाने को लेकर ऐसी कई घटनाएं हैं जिसमें मस्जिदों और मदरसों की भूमिका रही है। सीएए और एनआरसी को लेकर वर्ष 2019 में देश का माहौल बिगाड़ने और भ्रम फैलाने को लेकर मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकर का भरपूर उपयोग हुआ है। इससे पहले 1990 के दशक में जम्मू-कश्मीर को हिन्दू विहीन करने के असफल उद्देश्य को मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकर का उपयोग किया जा चूका था।

किशनगंज के थाना प्रभारी अश्विनी कुमार की हत्या के दौरान मस्जिद से किया गया था हत्या का एलान


 11 अप्रैल को किशनगंज के थाना प्रभारी अश्विनी कुमार जब देर रात ग्वालपाड़ा पहुंचे तो मस्जिद से एलान करके उनकी हत्या के लिए लोगों को उकसाया गया था।

प्रतिमा विसर्जन के दौरान पटना विश्वविद्यालय के छात्रों पर मस्जिद से फेंके गए थे बम


 2020 में पटना के अशोक राजपथ पर माता सरस्वती की प्रतिमा विसर्जन करने जा रहे पटना विश्वविद्यालय के छात्रों पर लालबाग मस्जिद से पत्थर फेंके गए थे। गोली और बम भी मस्जिद से चलाए जाने की बात सामने आई थी। इस घटना में कुछ पुलिस बल भी घायल हुए थे। ऐसे कई दृष्टांत हैं जिसमें मस्जिद और मदरसों की संदिग्ध छवि सामने आई है।

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कौन करेगा मॉनिटरिंग?


 इतनी बड़ी घटना के बाद आखिरकार आज मदरसों और मस्जिदों पर सवाल क्यों उठ रहे हैं? सरकार मदरसा को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपया खर्च कर रही लेकिन कभी भी इसकी मॉनिटरिंग के लिए किसी अधिकारी को जवाबदेही नहीं सौंपी जाती है। मदरसों में क्या हो रहा है, क्या पढ़ाया जा रहा है, किस प्रकार की शिक्षा इस आधुनिक युग में दी जा रही है- इन सवालों का जवाब सरकार के पास नहीं होता है। इसी का परिणाम है कि बिहार में आये दिन मस्जिदों और मदरसों से बड़े पैमाने पर हथियार की बात सामने आती है। अगर बांका की घटना की तरह मस्जिदों और मदरसों में फट जाए तो स्थिति की कल्पना कर रोआं सिहर जाता है। सरकार को चाहिए कि समय रहते ऐसे मस्जिदों और मदरसों पर सख्त कार्रवाई करे ताकि बांका की घटना की पुनरावृति ना हो सके।

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