देहरादून (विसंकें). भारतीय लोकतंत्र के सामने व्यक्तिवाद, जातिवाद, क्षेत्रवाद व साम्प्रदायिकता सबसे बड़ी चुनौती है. व्यक्तिवाद के कारण लोकतंत्र व्यक्ति विशेष का बंधक बन जाता है जो न समाज हित में है और न ही देश हित में उक्त बाते डॉ. राकेश सिन्हा ने सभागार में विश्व संवाद केन्द्र द्वारा आयोजित ‘लोकतंत्र के समक्ष उपस्थित चुनौतियां’ विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में सम्बोधित करते हुए कहा. उन्होंने पुलवामा में बलिदानी जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि भारत की बलिदानी परम्परा रही है. देश की रक्षा व सुरक्षा के लिए लम्बे समय से प्रत्येक भारतीय बलिदान के लिए तत्पर रहता है.

उन्होंने कहा कि देहरादून/उत्तराखण्ड के चारों शहीद भी उसी बलिदानी परम्परा के वाहक थे जो भारत माता की रक्षा में बलिदान हो गए. लोकतंत्र की रक्षा से पहले देश की रक्षा जरूरी है. उन्होंने कहा कि जातिवाद, क्षेत्रवाद व प्रान्तवाद को बढ़ावा मिला तथा साम्प्रदायिकता का जहर समाज में व्याप्त हो गया.

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि देश का मन बन रहा है कि पाकिस्तान को सबक सिखाया जाए. देश के लिए बलिदान होने वालों में उत्तराखण्ड का हिस्सा 10 प्रतिशत से अधिक है. कारगिल के युद्ध में उत्तराखण्ड के 40 प्रतिशत सैनिक बलिदान हुए थे. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार दृढ़ता के साथ पाकिस्तान की हरकतों के खिलाफ खड़ी है. इसलिए विश्व भी भारत के साथ है. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि देहरादून के महापौर सुनील उनियाल गामा ने भी अपने विचार व्यक्त किये. विश्व संवाद केन्द्र के निदेशक विजय कुमार ने लोकतंत्र के समक्ष उपस्थित चुनौतियां विषय की भूमिका रखी.

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