बिते कुछ दिनो से देश में चर्चा का विषय रही “लिंचिंग” कि घटनाओ पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने तिखा प्रहार किया है। नागपुर के रेशमबाग में आयोजित संघ के विजयादशमी समारोह में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने “लिंचिंग” को देश कि परंपरा के खिलाफ बताया। तथा “लिंचिंग” को विदेशी शब्द करार दिया। इस अवसर पर एचसीएल के संस्थापक पद्मश्री शिव नाडार, महानगर संघचालक राजेश लोया, विदर्भ प्रांत संघचालक राम हरकरे, महानगर सहसंघचालक श्रीधर गाडगे मंच पर उपस्थित थे। वही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केन्द्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितीन गडकरी, पूर्व सेना अध्यक्ष जनरल वी.के. सिंग, राष्ट्र सेविका समिती कि प्रमुख संचालिका शांताकुमारीने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिती दर्ज कराई।

विजयादशमी के अवसर पर स्वयंसेवको को संबोधित करते हुए सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि, संसार में कई शक्तिया ऐसी है जो भारत को आगे बढते हुए नही देख सकती। भारत का शक्तीसंपन्न होना ऐसी शक्तियो को खलता है। हमारे देश का दुर्भाग्य है कि, समाज में अब तक एकात्मता और समता कि स्थिती हमारी अपेक्षा के अनुसार नही है। नतीजतन हमारी जाति, पंथ, भाषा, प्रांत कि विविधताओ को भेद-भाव में परिवर्तीत कर आपसी अलगाव को बढावा दिया जा रहा है। ऐसे षडयंत्रो को समझ कर हमें उसे निरस्त करना होगा। शासन और प्रशासन में कार्यरत व्यक्तियो के बयान और निर्णय तोडमरोडकर प्रचारित किए जाते है। ऐसे तमाम क्रियाकलापो का विरोध होना चाहिए।

डॉ. भागवत ने बताया की, हमारे समाज में एक समुदायद्वारा दुसरे समुदाय के व्यक्तियो पर सामूहिक हिंसा की खबरे अखबारो में छप रही है। ऐसी घटनाए केवल एक तरफा नही हुई है। दोनो तरफ से एक-दुसरे पर आरोप लगाए जा रहे है। कुछ घटनाए जानबूझकर करावई गई है। वही कुछ घटनाओ को विपर्यस्त रूप में प्रकाशित किया गया है। कानुन और व्यवस्था के नियमो को ताक पर रख कर हो रही हिंसक घटनाए समाज के आपसी संबंधो को नष्ट कर देती है। ऐसी प्रवृत्तीया हमारी परंपरा का हिस्सा नही हो सकती। देश के हर एक व्यक्ती को कानुन और संविधान कि मर्यादा में रह कर चलना होगा। समाज में लिंचिंग जैसी घटनाए ना हो इसलिए स्वयंसेवक प्रयासरत रहते है। ऐसी घटनाओ में लिप्त व्यक्तीयो का संघ कभी समर्थन नही करता। सरसंघचालक ने आगाह करते हुए कहा की, देश में समाज को बाटने का व्यापक षडयंत्र चल रहा है। ‘लिंचिंग’ जैसे शब्दो के प्रयोग से हिंदू समाज को बदनाम करना और अन्य वर्गो में भय पैदा करने का प्रयास हो रहा है। भडकाऊ भाषा और कृति से सभी को बचना चाहिए। तथा ऐसी घटनाओ को रोखने के लिए कानुन का सख्ती से अमल होना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published.