मुंगेर (विसंके)। भारती शिक्षा समिति/शिशु शिक्षा प्रबंध समिति, बिहार द्वारा आयोजित छः दिवसीय ऑनलाइन समर कैम्प के चौथे दिन बाल वर्ग बहन के कार्यक्रम में कत्थक नृत्य विषय पर बोलते हुए मुख्य अतिथि एसएमकॉलेज भागलपुर की एसोसिएट प्रो. आशा तिवारी ओझा ने कहा कि लौकिक से अलौकिक आनंद की अनुभूति की तरफ ले जाने का नाम है कत्थक नृत्य। एक ओर जहां पश्चिमी संस्कृति बड़ी तेजी से हमारे समाज में फैल रही है वहीं कत्थक नृत्य भारतीय संस्कृति, सभ्यता, आध्यात्मिक पृष्ठभूमि, नैतिक वातावरण, और योग की ओर इंगित कर रहा है। हमारी संस्कृति मातृ प्रधान है। यह समर कैम्प बालिकाओं के उत्थान एवं मातृशक्ति के जागरण का संदेश दे रही है। बालिकाओं के उत्थान का मतलब समाज का उत्थान, समाज का उत्थान यानि राष्ट्र तथा भारतीय संस्कृति का उत्थान एवं जागरण जो इस समर कैम्प में सार्थक सिद्ध हो रहा है।

वहीं कला निकेतन केन्द्र के प्रबंधक एवं राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त तथा आज के कार्यक्रम के अतिथि निभाष चन्द्र मोदी ने कत्थक नृत्य के बारे में कहा कि नृत्य और अभिनय के संयोग से जो उत्पत्ति होती है उसे नृत्य कहते हैं। यह दो प्रकार का होता हैं-शास्त्रीय एवं लोक नृत्य। शास्त्रीय नृत्य का मतलब व्याकरण में डांस करना एवं कत्थक का मतलब कहानी या कथा पर डांस करना। कत्थक का पुराना नाम नटवरी नृत्य था। नृत्य में भाव भंगिमाओं एवं ताल की बहुत बड़ी भूमिका होती है। कत्थक नृत्य के चार घराने लखनऊ, जयपुर, बनारस और रायपुर, एवं नौ रस होते हैं।

सरस्वती विद्या मंदिर, मुंगेर की छात्रा नंदिनी राज ने कत्थक नृत्य कर उसके विभिन्न स्टेप्स को बताया। वहीं आनंदराम सरस्वती विद्या मंदिर, भागलपुर की छात्रा सुरूचि द्वारा कबाड़ से जुगाड़ विषय पर प्रकाश डालते हुए फूलदानी, फोटो फ्रेम, दीया एवं पेन स्टैंड इत्यादि बनाकर दिखाया कि किस प्रकार घर के बेकार समानों से भी उपयोगी सामग्री बनाया जा सकता है।

शिविर का उद्घाटन सरस्वती विद्या मंदिर, मुंगेर के प्रधानाचार्य नीरज कुमार कौशिक, अनंत कुमार सिन्हा एवं प्रांतीय सोशल मीडिया प्रमुख संतोष कुमार के द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

वहीं बाल वर्ग भैया शिविर की अध्यक्षता करते हुए भारती शिक्षा/शिशु शिक्षा प्रबंध समिति बिहार के प्रदेश सचिव प्रकाशचंद्र जायसवाल ने कहा कि मानव जीवन सदैव से सौंदर्य प्रेमी रहा है। सभ्यता हमारी जीवन यापन की पद्धति को इंगित करता है जबकि संस्कृति हमारी मानसिक क्षेत्र की प्रगति की सूचक होती है। मनुष्य जो भी विकास करता है वो उसकी संस्कृति की मिसाल बन जाती है। भारत राम-कृष्ण की धरती है। भगवान बुद्ध एवं महावीर की जन्मभूमि एवं कर्मभूमि है। उनके द्वारा दिए गए संदेश को ध्यान में रखते हुए अगर हम अपनी जीवन यात्रा को आगे बढ़ाते हैं तो हम भी एक मिसाल पैदा कर सकते हैं।

मुख्य अतिथि बौंसी के प्रखंड विकास पदाधिकारी पंकज कुमार ने कहा कि भगवान राम वर्तमान समय में बहुत हीं प्रासांगिक हैं। राम का आदर्श एक अनूठा आदर्श है। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि कर्म करो फल की चिंता नहीं करो। हमें राम और कृष्ण से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ना चाहिए एवं उनकी छवि अपने अंदर उतारना चाहिए।

विशिष्ट अतिथि प्रभात खबर, बॉका के संवाददाता संजीव कुमार पाठक ने कहा कि सरस्वती शिशु/विद्या मंदिर हमारी परंपरा एवं संस्कृति के साथ बच्चों को एक अच्छा संस्कार देने का काम करती है। हमारे छोटे-छोटे नौनिहाल भी राम, कृष्ण, गॉंधी, रामप्रसाद बिस्मिल आदि के गुणों एवं आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें ताकि एक अच्छे संस्कारवान समाज का निर्माण हो सके। अगर हमारा समाज संस्कारवान होता है तो हमारा राज्य, हमारा देश काफी बेहतर तरक्की कर सकता है।

आज के कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति पर आधारित रूप-सज्जा विषय पर प्रस्तुति देते हुए भैया प्रवीण कुमार द्वारा भगत सिंह, भैया माविया जावेद द्वारा राम प्रसाद बिस्मिल, भैया आदित्य चौहान द्वारा महात्मा गॉंधी, भैया सत्यम सक्सेना द्वारा दशरथ मॉझी, भैया सत्यम साईं द्वारा भगवान कृष्ण, बहन अराध्या सिंह द्वारा भारत माता की भूमिका का निर्वाह करके विभिन्न पात्रों का परिचय देते हुए रूप-सज्जा का प्रदर्शन किया गया।

अतिथि परिचय कार्यक्रम की संयोजिका पाणिनी मिश्रा एवं संयोजक संजीव कुमार झा, धन्यवाद ज्ञापन खुशबू झा एवं विमल कुमार सिंह तथा मंच का संचालन बहन शिप्रा लाल एवं आदित्य चौहान के द्वारा किया गया।

इस विशेष अवसर पर कार्यक्रम के मार्गदर्शक ब्रह्मदेव प्रसाद, बिनोद कुमार, कार्यक्रम प्रमुख रूपम रानी, उमाशंकर पोद्दार, राजेश कुमार रंजन, कार्यक्रम सहायक रामचन्द्र मंडल, डॉ. अजीत कुमार पांडेय, तकनीकी सहायक नरेश कुमार पहुजा एवं आलोक कुमार सिन्हा के साथ विद्या भारती दक्षिण बिहार के अनेक अधिकारीगण उपस्थित थे।

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