मजबूरी की मजदूरी छोड़कर संजीव कुमार आज एक सफल कृषक हैं। 2002 में जहां 1200 रुपये महीने पर दिहाड़ी मजदूरी करते थे वहीं आज अंडा उत्पादन से प्रति माह पचास हजार से अधिक की कमाई कर रहे हैं।

संजीव कुमार, कुशियारपुर, सुपौल के रहनेवाले हैं। अत्यंत सामान्य परिवार से आनेवाले संजीव के जीवन में एक वक्त ऐसा भी आया जब घर में खाने के लाले पर गए। संजीव अपनी पांचवी की पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करने गुजरात चले गए। वह वर्ष 2002 था। उस समय 1200 रुपया प्रति माह के दिहाड़ी मजदूर थे। मजबूरी की मजदूरी रास नहीं आई। 2005 के अंत में वापस अपने गांव आ गए। 2006 में छोटे स्तर पर ब्रॉयलर फर्म शुरू किया। काम बढिया से चलने लगा लेकिन इसे बेहतर ढंग से करने के लिए अररिया स्थित कृषि विज्ञान केंद्र गए।

वहां से पॉल्ट्री का प्रशिक्षण लिया। वापस अपने गांव में जमीन लीज पर लेकर पॉल्ट्री फर्म शुरू किया। 40 ग्राम का चूजा लाते हैं। उसे पोल्ट्री में रखकर फिर मुख्य घर में रखते हैं। आज 9100 मुर्गियों से प्रतिदिन 8500 अंडों का उत्पादन होता है।

—– संजीव कुमार

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